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प्रचार खिडकी

सोमवार, 14 सितंबर 2009

मां की न कर सके तो, बेटी की सेवा करें...(हिंदी दिवस पर )


कैसे समय बीतते बीतते ठीक उसी जगह पर पहुंच जाता है....जहां से चलना शुरू करता है.....ऐसा लगता है जैसे अभी तो हिंदी दिवस बीता था....और अब बिना कुछ बदले...कुछ नया हुए....कुछ अलग हुए....फ़िर आ गया....ऐसा थोडी होता है....कम से कम ...त्रेता से द्वापर तक का समय तो मिलना ही चाहिये....तभी तो कुछ कर पायेंगे हिंदी के लिये....आखिर ..पूरे सवा या उससे भी ज्यादा लोगों को समझाना है कि हिंदी ही ......हमारी राष्ट्र भाषा है ...हमारी अपनी भाषा है....कम से कम वो एक इकलौती भाषा ....जिसके दम पर अपने इतने बडे देश में ..हम निश्चिंत होकर घूम सकते हैं....कि चलो कम से कम बतिया तो लेंगे ही सबसे ....न सही ..अपनी बात तो कह ही लेंगे......और यदि आज हिंदी दिवस के बहाने इसे दोबारा याद कर लिया जाये....कुछ देर आपस में बैठ कर हिंदी में बोल बतिया लेने से इसका रत्ती भर भी भला हो पाता है ...तो यही सही.....

हालांकि मुझे हमेशा ही इस बात से सख्त ऐतराज़ रहा है कि ....बहुत से लोग कहते हैं कि हिंदी कमज़ोर होती जा रही है.....इसकी सेहत की चिंता जाने कैसे कैसे ....कितनी जगह पर की जाने लगती है....और इस हफ़्ते...महीने में तो खास तौर पर इसे ..पल्स पोलियो ड्रोप्स पिलाने की तैयारी की जाती है....मैं तब सोचने लगता हूं.....ये अपनी हिंदी कमज़ोर कैसे हो गयी....बचपन से आज तक तो इसे वैसे ही ...सेहत मंद देखा है....घर से लेकर बाहर तक...दोस्त से लेकर दुश्मन तक.....गाने से लेकर ...रोने तक...और छोडने से लेकर ..लपेटने तक...सिर्फ़ हिंदी ही हिंदी दिखी मुझे तो ...दिखी क्या अब भी वही दिखती है.....मेरा दूध वाला.....मेरा सब्जी वाला.....मेरा मिस्त्री....मेरा ..अरे किस किस का नाम लूं सब के सब ....हिंदी मे ही बात करते हैं....अपनी उधारी भी हिंदी में ही वसूलने आते हैं....और खुदा ना खास्ता ...जब किसी बहाने पर उन्हें यकीन नहीं होता....तो ससुरे ...कोसते...गलियाते भी हिंदी में ही हैं.....कितनी बार कहा है..कि यार कम से कम गाली तो ........मगर न जी....पूछा भी कि अबे.....ये हिंदी दिवस लगता तुम लोगों के लिये ही मनाया जाता है....वे कहने लगे...कौन सा दिवस...कौन सी रात्रि....हम लोग तो यही बोलते समझते हैं....हमने मन ही मन कहा बेवकूफ़ कहीं के....कहां तो सरकार इनके लिये इत्ते पैसे खर्च कर रही है....और इन्हें पता तक नहीं.......क्या कहा इनके लिये थोडी कर रही है......तो फ़िर.....?

ओह तो उनके लिये.....जो टीवी....रेडियो....और अपने...इंटर्व्यू में...इंग्रेजी छांटते हैं...धत तेरे की....अपनी जनसंख्या में...वे लोग हैं ही कितने जी...मुट्ठी भर भी नहीं....उनके लिये इत्ता सारा ....और हमने तो सुना है कि ई सब बडका लोग भी ....अपने घर में...अपने धोबी, माली, नौकर, चाकर, ...सबसे हिंदी में ही...मतलब आ जाते हैं अपनी औकात पर ..........धत तेरे कि....यही सच है जी...

चलते चलते ...एक बात .....कल परसों जब मेरे कार्यालय में ...हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया....तो जो हमारी कार्यशाला को संचालित करने आये थे....उन्होंने एक बात कही जो मेरे मन को बहुत ही गहरे तक प्रभावित कर गयी.....उनका कहना था.....संसक्रत (यदि किसी को बराहा में व्रित...प्रव्रति आदि लिखना पता हो तो बतायें...अब तो आप समझ ही गये होंगे..संस्क्रत ऐसे क्यों लिखा )....जो सभी भाषाओं की जननी यानि मां है...उसकी सेवा तो हम नहीं कर पा रहे हैं.....मगर कम से कम बेटी ...हिंदी की सेवा का जो मौका मिला है ..उसे तो कर ही सकते हैं...चाहे जिस रूप में भी हो....चाहे जिस तरह से भी हो......आने वाले बच्चों को हमें ये एह्सास कराना ही होगा कि ...हिंदी हमारी....हमारे परिवार की...देश की..समाज की ताकत है....उनकी अपनी ताकत है...
मेरी कोशिश जारी है.........................................और आपकी................................

रविवार, 6 सितंबर 2009

पहले कमाओ.....फ़िर नौकरी पाओ...



..है न कमाल..या शायद थोडा कन्फ़्यूजिंग.....नहीं जी बिल्कुल भी नहीं...जब आप भी पूरी बात सुनेंगे ..तो कहेंगे .कि ये तो सच ही है....दरअसल बात ये है कि अभी हाल ही में...केन्द्रीय विद्यालय संगठन में कई पदों की भर्ती का इश्तहार विग्यापित किया गया है...खुशी की बात है न.....आज जब सरकारी नौकरियों में काफ़ी कटौती की जा रही है तो ऐसे में..यदि इस तरह की चुनौतियां बच्चों को मिल रही हैं..ये उनके लिये निसंदेह अच्छी बात है.....यहां तक तो सब ठीक है .....मगर इसके आगे ....

इस पद को पाने के लिये जो प्रतियोगिता आयोजित की जायेगी...उसके लिये आवेदन मंगाये गये हैं...और उस आवेदन के साथ परीक्षार्थी को मात्र ....एक हज़ार रुपये की राशि जमा करनी है...अब ये आपकी श्रद्धा है....आप उसे ड्राफ़्ट के माध्यम से जमा करवाते हैं..या पोस्टल और्डर के माध्यम से...राशि सिर्फ़ ....मात्र एक हज़ार रुपये ही रहेगी....देखा सरकार कित्ते कम पैसे में ..बेरोजगार बच्चों को इतना सुनहरा अवसर दे रही है...मेरे ख्याल से सरकार शायद ये सोच रही है कि ..बच्चे पहले कमाना सीख लें..थोडे पैसे वैसे बचाना सीख लें.....फ़िर नौकरी भी दे दी जायेगी उनको....क्या कहा ...क्या पूछ रहे हैं आप ....नौकरी से पहले कमाना कैसे सीख सकेंगे बच्चे...लिजीये ..इससे सरकार को क्या लेना देना....भई वो सरकार है ...कुछ भी सोच सकती है....

मैंने भी अपने अनुज को इस प्रतियोगिता में आवेदन के लिये कहा था....मगर इत्ती सी फ़ीस सी फ़ीस को देख कर ....और उसकी अपार काबिलियत को देख कर थोडा सा ठिठक गया.....फ़िर सोचा इसी बहाने ...उनसे पूछूं तो सही कि ...ये इतनी सब्सीडी काहे दे रहे हो भाई.....बेरोजागारों को ....

हेल्लो...जी देखिये आपने जो ये फ़ौर्म निकाला है न....यार इसकी फ़ीस तो बहुत ज्यादा है...बंदा सिर्फ़ इसमें भाग लेने के लिये इतनी राशि खर्च कैसे करेगा...वो भी बेरोजगार व्यक्ति....

अबे जाओ ..ये कौन सी ज्यादा राशि है भई....कौन सी दुनिया में हो ..इत्ते में तो दस किलो दाल भी नहीं आयेगी......

आयं...नौकरी से दाल का क्या कनेक्शन भाई........

लो अब ये भी मैं बताऊं.... दाल से आज किस चीज़ का कनेक्शन नहीं है....और तो और ..सुना है सोना जो महंगा हुआ है ..उसमें भी कहीं न कहीं दाल का ही हाथ है....और सुनो ..विश्व में भारतीय अर्थव्यवस्था का अपना जो एक अलग और मजबूत स्थान बन रहा है ....सब दाल की बदौलत ....वे कह रहे हैं....जो देश दाल इतनी मंहगी खा सकता है ...वो जरूर ही ......

अरे भाई रूको रूको...यार मैं आवेदन की फ़ीस की बात कर रहा हूं आप दाल की गाये जा रहे हो....यार जब हमने फ़ौर्म भरा था ऐसे पदों के लिये तब तो मात्र बीस पच्चीस रुपये हुआ करते थे.....अब भाई को भरवाना है...

तो अब तो आप रिटायर हो चुके होंगे ....या होने वाले होंगे......?

अरे नहीं भई...सिर्फ़ दस साल पहले की बात है यार....आप तो कमाल करते हैं.....

तो तब क्यों नहीं भरवा दिया अपने भाई को फ़ौर्म अब इतनी मंहगाई में ये तजुर्बा क्यों कर रहे हो......

यार तब उसकी उम्र नहीं हुई थी.....अब हुई है...

अरे तो इतनी मंहगाई में जवान होगा तो ...भुगतना तो पडेगा ही न........

उसने फ़ोन काट दिया.....मैं भी लटका हुआ हूं....सोच रहा हूं इससे अच्छा तो एक दाल की दुकान ही खुलवा दूं...वैसे जिन जिन के पास मात्र हज़ार रुपये हों वे यह सुनहरा अवसर न छोडें.....


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