इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

प्रचार खिडकी

शुक्रवार, 22 अक्तूबर 2010

क्या ब्लॉगजगत को वाकई एक एग्रीगेटर की कमी खल रही है ..????




ब्लॉगवाणी के बंद होने के बाद कुछ दिनों तक अफ़रातफ़री का माहौल रहा ....इसके कुछ दिनों बात थक हार कर फ़िर से अटकलों / अफ़वाहों का दौर चला । अब उस समय को बीते काफ़ी समय हो चुका है और यदि लोग ब्लॉगवाणी को नहीं भी भूल सके हैं ( जबकि मुझे विश्वास है कि एक हिंदी ब्लॉगर शायद ही कभी एक एग्रीगेटर के रूप में ब्लॉगवाणी की सेवा को भूल सके ) तो कम से कम उसके लिए मायूस हताश नहीं दिखते । मगर इन सबके बावजूद अक्सर ब्लॉगर्स और पाठकों की एक शिकायत गाहे बेगाहे सुनने को मिल ही जा रही है कि पाठक कम हो गए हैं ..या कम से कम टिप्पणियों के आने पर अंतर पडा है । और कम से कम मेरे से ये दलील आसानी से गले नहीं उतारी जाती कि टिप्पणी का कोई फ़र्क नहीं पडता । पडता तो है जनाब ....क्या और कितना ये तो सबके अपने अपने पैमाने हैं ।

इधर हालफ़िलहाल ..कई नए मित्र एग्रीगेटर्स भी आ गए हैं । हमारीवाणी , इंडली , और ब्लॉगप्रहरी जो नए रूप में सामने आया है । इनके अलावा ढेर सारे निजि और सार्वजनिक फ़ीड एग्रीगेटर्स भी हैं जो अपनी सेवा दे रहे हैं । मगर इन सबके बावजूद एक एग्रीगेटर की कमी तो जरूर खल रही है ..और यकीनन बेहद खल रही है । एक एग्रीगेटर जो ब्लॉगवाणी की तरह तेज़ हो ..ढेर सारी पोस्ट फ़ीड को पहले ही पन्ने पर समेटे हुए हो । फ़िर चाहे अपनी तमाम खूबियों कमियों को वो रखे या हटाए ।

हालांकि वर्तमान में चिट्ठाजगत ही सबका इकलौता प्रिय एग्रीगेटर है और उसकी कई अनोखे और विशिष्ट सुविधाएं हैं मगर कभी कभी ये धीमा लगता है और ऐसा भी महसूस होता है कि इसके कलेवर में भी थोडा बहुत बदलाव किया जाना चाहिए मसलन उसकी कई सूचियां अभी भी अद्यतित नहीं हैं या काफ़ी पुरानी हैं । तो आपको क्या लगता है कि क्या ये कमी मुझे ही महसूस हो रही है या आप सबको भी ..........


मुझे तो इंतज़ार है एक ऐसे ही मनपसंद एग्रीगेटर का .....और आपको ???????

रविवार, 10 अक्तूबर 2010

शनिवार, 9 अक्तूबर 2010

दबाव में है बचपन : दैनिक आचरण सागर (मध्य प्रदेश ) में प्रकाशित मेरा एक आलेख






आलेख को पढने के लिए बस उस पर चटका लगा दें , आलेख खुद ही अलग खिडकी में खुल कर बडा हो जाएगा और आप उसे आराम से पढ सकते हैं ॥

गुरुवार, 7 अक्तूबर 2010

दैनिक विराट वैभव (दिल्ली ) में प्रकाशित मेरा एक आलेख ...









आलेख को पढने के लिए उस पर चटका लगा दें , छवि बडी होकर अलग खिडकी में खुल जाएगी

बुधवार, 6 अक्तूबर 2010

दैनिक विराट वैभव , दिल्ली में प्रकाशित मेरा एक आलेख ........






आलेख पर चटका लगाने से ये अलग खिडकी में खुल जाएगा और छवि को आराम से पढा जा सकता है




शुक्रवार, 1 अक्तूबर 2010

पोस्ट लिखिए और नोट छापिए ......अरे सच्ची मुच्ची यार .....झा जी लिखिन ..


अब तक हम आपको ..अपने आलेखों की प्रतियां ..यहां छाप छाप के ....जबरिया पढाते रहे हैं न ........चलिए आज आपको ...पोस्ट , प्रैस , और फ़िर पोस्ट के चक्र ...और उस बीच में नोट वर्षा के बारे में बताते हैं । देखिए कित्ता आसान है ...पहले ..आप पोस्ट लिखिए ..। अरे पोस्ट का मतलब पोस्ट ही होना चाहिए ...ये न हो कि ..पोस्ट के बदले ..पोस्टमार्टम ...हो ..। इसके बाद उसकी कॉपी को आप सभी संपादकों ( समाचार पत्रों , साप्ताहिकों , और पत्रिकाओं के ) को मेल कर दें । ध्यान रहे कि साथ में आपका शपथ पत्र अवश्य होना चाहिए कि , साथ संलग्न रचना , मौलिक रूप से आपकी ही है , और इसका कोई भी अंश या पूरा आलेख कहीं अन्यत्र से नहीं लिया गया है । बस आपका काम खत्म , रचना के छपते ही ..एक तो वो लाखों पाठकों के बीच पहुंच जाता है .....छपने के बाद आप उसे पुन: पोस्ट के रूप में अपने ब्लॉग पर लगा सकते हैं , ताकि उससे दूसरे भी प्रेरणा ले सकें ....दूसरा फ़ायदा ये कि ...मीटर डाऊन ...सो मजे से चैक का इंतज़ार करिए ।

अब भईया ..गूगल बाबा का अकाऊंट तो साला पहले ही टैं बोला हुआ है ..कम से कम ..हम हिंदी ब्लॉगर्स के लिए तो जरूर ही ...सो यही सही ..क्यों क्या ख्याल है आपका । लिजिए...फ़ॉर योर रेडी रेफ़रेंस .....एक ठो ताजा ताजा आए चैक का नमूना इहां पेश किए दे रहे हैं ... अभी पिछले महीने जागरण जंक्शन का ग्यारह सौ का चैक वाला ईनाम तो आपको याद ही होगा .....तो बस शुरू हो जाईये ...और कौनो दिक्कत हो ..तो ..हम हूं न .....

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