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शनिवार, 20 अप्रैल 2013

छिटके, भटके ,छितरे , बिखरे ....कुछ आखर



















तुम,
उन सपनों के,
कतरों को,
संभाल के रखना यार ,
मुझे यकीन है,
इक दिन ,
बहुत याद आएंगे वे,
खुली आंखों से ...
ताउम्र तुम्हें,
रात भर नींद कहां आएगी ......................................

******************

ये आखें ,
बडी जीवट होती हैं ,
जागती हैं तो ,
होती है ,
मंज़िलों पर नज़र ,
और सोती हैं तो,
नींद में ,
मंज़िलों से भी,
ऊंचे ख्वाब देख जाती हैं ............

******************

अच्छा है,
ये कि
मेरा कहा,
अनकहा भी ,
बहुत खूब समझती हो ,
ये और अच्छा है,कि,
मेरी किताबों,
मेरे शब्दों को ,
मेरा मेहबूब समझती हो .............

********************
अच्छा है ,
ये कि
मेरा किया ,
अनकिया भी ,
तुम खूब समझते हो ,
तुम भी तो ,
मेरी लाली ,
मेरे पाउडर को ,
मेरा मेहबूब समझते हो


**********************

जिंदगी तुम,
बेरहम बहुत हो ,
खुशियों और दर्द का,
बराबर हिसाब रखती हो ,
जो मुद्दतों से ,
सो भी,
नहीं पाई हैं आंखें ,
क्यूं उनमें सुनहरे ख्वाब रखती हो ....

जिंदगी तू निर्मोही बडी ........................

***********************************

अब यकीन,
हो चला है ,
कयामत तक ,
हम नहीं बदलेंगे ,
ये समाज नहीं बदलेगा ,
इंसानों की शक्ल में,
कोई हैवान है ,
हमारे भीतर ही ,
जो कल नहीं बदला , आज नहीं बदलेगा ......................

*************************

रविवार, 31 मार्च 2013

ठीक है -- नहीं ठीक नहीं है

सब ठीक है



खौफ़नाक है मंज़र क्यूं , आज मेरे शहर का ,
वो कहते हैं , ठीक है , मगर इस देश की हालत ठीक नहीं है ॥


जंगलों में भी कहां दिखती है ऐसी हैवानियत अब,
खुद की नस्ल का शिकार करता , ये आदमजात ठीक नहीं है ॥


हर बार निपटने का वादा और अब न होने देने की बातें ,
हर बार कुछ हो जाने पर यही कहते हो , ये बात ठीक नहीं है ॥


इक तरफ़ पूजते हो माता और देवी कह -मान कर ,
मगर नारी के प्रति अब , तुम्हारे ख्यालात ठीक नहीं है ॥


कैसे कह दूं कि बसर हो रहा है जीवन चैन और सकून से ,
काले दिन भी डराते हैं मन को ,उजली ये रात ठीक नहीं है ॥


क्यूं करूं गैरों से गिले-शिकवे , और उंगली उठाऊं उनपे,
जब पाया है कि बंद कमरों में , अपनों का भी साथ ठीक नहीं है ॥


जो करता रहा है दावा , गरीबों मजलूमों के साथ होने का,
बरसों से भर रहा है जेबों को अपनी , वो "हाथ", ठीक नहीं है ॥


चलता है , जो किश्तों में मिले , ज़ख्मों का कतरा कतरा,
मगर दुखों से बांध दो रिश्ता , रंजो-गम की , बारात ठीक नहीं है ॥


हम निपट लेंगे, सुलट लेंगे, एक आध , तीन चार को भी ,
मगर धूर्तों की टोली, चोरों की पूरी जमात , ठीक नहीं है ॥


इतिहास का सबक सीखना होगा , बडे ही गौर से हाकिम ,
फ़िर किसी अंधे के हाथ हस्तिनापुर को देना , हे तात! ठीक नहीं है ॥


आप सियासती लोग हैं जो भी , खेलना खूब जानते होंगे,
अवाम क्या जाने शह-मात की भाषा , बिछाना यूं शतरंजी बिसात ठीक नहीं है ॥


लडने को गरीबी, बेकसी, बेकारी और बीमारी बहुत है ,
घसीटते रहो , भाषा, धर्म , मज़हब और जात-पात ठीक नहीं है ॥


तुम बढाने को खजाने का वजन , महंगा हर बाज़ार करो बेशक ,
मगर बोझ तले मर जाए आम आदमी ही , गरीब की छाती पर लात ठीक नहीं है ॥

तुम्हारी मजबूरी हम खूब समझते हैं , चुप रहने की , रहो खामोश ही,
मगर हमारे सैनिकों की सिरकटी लाश पर भी न छलकें , ज़ज़्बात ठीक नहीं है 


करो खूब दोस्ती के वादे उनसे , और निभाते चलो टूटते बनते रिश्ते,
हर बार बारूद की खेप , मिलती जो आतंक की सौगात ठीक नहीं है ॥


सोने चांदी की कीमत अब जान से ज्यादा है , मेहबूब मेरे,
यूं सरेआम निकल जाना पहन के जेवरात , ठीक नहीं है ॥ 



ठीक नहीं है .....ठीक नहीं है

बृहस्पतिवार, 28 जून 2012

शहरों में आंसुओं का अब स्वाद नमकीन नहीं होता...







उन्हें शक है कि उजले , चमकीले ,
शहरों में ,शायद कभी कोई नहीं रोता
कह दो है वो, इतना है हर रात ,रोता ,
पता चल गया होता कबका जो ,तुमने चख लिया कहीं होता 
शहर में आंसुओं का स्वाद , अब नमकीन नहीं होता



हर दरख्त की जड मिट्टी में होती है ,
हर पेड की मंज़िल आसमां हो बेशक ,
लकडी का कोई टुकडा बनने कुर्सी सियासत की ,
यकायक ही कभी नामचीन नहीं होता ,


शहर में आंसुओं का स्वाद , अब नमकीन नहीं होता

वो जो फ़र्क जानते हैं मान और अपमान का ,
वही तो चापलूसी बेइज़्ज़ती महसूस करते हैं ,
गरीब की बस रोटी ही इक आखिरी औकात है ,
भूखे  का किसी दम भी तौहीन नहीं होता ..

शहर में आंसुओं का स्वाद , अब नमकीन नहीं होता



उसूलों कानूनों की एक फ़ौज़ है फ़िर भी ,
हादसों अपराधों के लिए हुआ मशहूर मेरा देश ,
है इक दस्तूर अब यहां बहुत मजबूत सा हो चला ,
काबिल वकील साथ में हो , जुर्म कोई सा भी हो ,संगीन नहीं होता

शहर में आंसुओं का स्वाद , अब नमकीन नहीं होता


खुली बंद हर जोडी आंखो को है , हुक्म कि सपना देखें ,
फ़िर ताउम्र उस सपने को पाने में , न वक्त बेवक्त अपना देखें ,
बेशक शहर भी सपने देखता होगा , मगर स्याह और सफ़ेद ही ,
इतनी चकाचौंध उजियारी रातों में , कोई सपना रंगीन नहीं होता

शहर में आंसुओं का स्वाद , अब नमकीन नहीं होता



सोमवार, 18 जून 2012

ज़िंदगी के पन्नों पर ,बिखरे आखर .....


चित्र , गूगल इमेज खोज इंजन के परिणाम से , साभार





ये न पूछ मुझसे कि ये आज मुझे हुआ क्या है ,
जो ज़िंदगी ही मर्ज़ है तो बता इसकी दवा क्या है

पत्थर के इस शहर में जाने हर ईंट क्यूं पराई है
धधक रहा है कुछ भीतर , किसने ये आग लगाई है


चल माना दस्तूर अदला बदली का है , द्स्तूर निभाया ही जाए जरूरी तो नहीं
जो देते रहे ताउम्र इस ज़िदगी को ,वही ज़िंदगी से पाया भी जाए जरूरी तो नहीं


कतरों और किश्तों में बंटी जिंदगी ,तकदीर, जो तेरी यही रज़ा है ,
जो जिंदगी आसान ही होती जाए , तो ये मौत भी बेमज़ा है ...

तू अब न मुझे डराया कर जिंदगी,बता क्या नहीं अब तक खोया हूं मैं ,
गीली आंखों को भी रोने दे ज़रा, बहुत हंसती आंखों से रोया हूं मैं


ज़िन्दगी , क्यूं तुझसे कोई शिकायत करूं , इक मुझसे ही तू खफ़ा तो नहीं ,
तेरी वफ़ा पर होते रहे शुबहे , मौत मेहबूबा ही कभी हुई बेवफ़ा तो नहीं

छूटा गांव , बिछडे अपने , पकडी जो , उस रेल को कोसता हूं मैं ,
जीतने की ज़िद थी जिंदगी के खेल की , उस खेल को कोसता हूं मैं ...

जिंदगी को बहुत अच्छे से महसूसता रहा , कि इस देश का अवाम हूं मैं ,
जो यूं करता हूं ज़िक्र जिंदगी मौत का , बस इसलिए कि आदमी आम हूं मैं


जिंदगी यूं न कटेगी , इसे जीने का पहले ,दस्तूर समझ लो ,
सज़ा कबूलने में आसानी होगी ,इक बार अपना कसूर समझ लो

मत रोक मुझे , मत टोक मुझे , आज तो जी की कहने दे ,
कब तलक मुस्कुराती रहेंगी आंखे , आज अश्कों को बहने दे


मुझे नाहक ही दर्द महसूस हुआ , ये शाम ही है कुछ उदास उदास ,
जिंदगी इर्द गिर्द थी होठों के आजकल बसेरा है उसका आंखों के आसपास


दिन काट लेते हैं तपिश में जलाते खुद को ,क्यूं ये रात अच्छी नहीं लगती ,
कैसे मिलने का वादा करूं तुमसे जब खुद से मुलाकात अच्छी नहीं लगती

मुहब्बत से झूठी कोई शै नहीं ,इश्क से बडा और कोई व्यापार नहीं
जिंदगी तो हमेशा से बेवफ़ा रही है , मौत भी अपना यार नहीं ....


हर बार मैं तुझसे मिला के आंखें , मुस्कुरा दूं , ऐसा कोई करार नहीं है ,
जो तुझे मेरी कद्र नहीं , तो जा जिंदगी , मुझे भी तुझसे अब प्यार नहीं है

रविवार, 26 फरवरी 2012

सर्द हवा में जियरा कांपे ..इ फ़ागुन में जोगी कैसे गाएगा जोगीरा रे




दौडती हुई ट्रेन की खिडकी से , मोबाइल द्वारा खींची गई एक फ़ोटो





छुट्टी का दिन , सुहाना मौसम , सो आन पडी इक दुविधा ,
कंप्यूटर तोडें खट खटाखट , या धूप में पढें कहानी कविता ..





अलसाई , अल्हड और चमकीली सी उग आई है भोर ,
फ़ागुन मास होवे मदमस्त ,किंतु इहां तो चले है चिल्ड हवा घनघोर 





जेटली चचा बोले हैं , यूपीए सरकार भूल चुकी है,शासन करने की कला
अबे तो साइनिंग इंडिया से लेकर भारत निरमान तक , घंटा हुआ है भला ..



एनसीटीसी पर पीएम ,मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाएंगे ,
उस बैठकी में का कहना है , मेड्म्म से पूछ के बताएंगे ....



कम नहीं होंगे चुनाव आयोग के अधिकार : अईसा भरोसा दी है सरकार ,
ओहो अच्छा , बहुत अच्छे , अबे आखिर इत्ता काहे छलक रहा है आयोग पे प्यार ..



अबे जौन स्टेट के लिए ई लोग आयोग का मैय्यत निकाला हुआ है ,
ऊ इस्टेट का हेल्थ में ही , अरबों खरबों का घोटाला हुआ है ..



NDTV बता रहा है , काहे टीम इंडिया ,महापिरलय की झेल रहा है मार ,
अबे अभी वक्त है हॉकी का , बंद करो , ई साला रूटीन बकावास है यार  





चैनल का सबसे बडा खबर , दोस्त बने धोनी आ सहवाग ,
बने काहे , अबे जब अच्छे हैं , तो थोडे और लगाओ दाग .....





मुलायम अत्याचारी , माया भ्रष्टाचारी : बोल दिए बाबा अमर ,
अब जाके इनको पता चला , जब बीत गई रे उमर ,...





सर्वोच्च न्यायालय :पुलिस की कार्वाई लोकतंत्र पर प्रहार ,
ई ऑर्डर के बाद , ऊ ऑर्डर का जिम्मा नहीं कोई लेने को तैयार ..





कांग्रेस नहीं तो यूपी में राष्ट्रपति शासन , कोयला मंतरी जी दे दिए बयान ,
सुना है महापिरलय के विशेषज्ञ इसे राग कोयलाबेरी का साईड इफ़्फ़ेक्ट रहे हैं मान ..



आरक्षण की मांग को लेकर 14 जगह ट्रैक जाम करेंगे जाट ,
अबे का पटरी से आरक्षण मिलेगा , काहे कर रहे हो पसिंजर की खडी खाट ..



अभी ठंडी नहीं हुई है कॉमनवेल्थ घोटाले की आंच ,
दिल्ली उपराज्यपाल के खिलाफ़ शुरू हुई सीबीआई की जांच



बीस मिनट में दु सौ खबरें , इंडिया टीभी दिखा रहा है ,
इस हिसाब से साठ मिनट में टोटल केतना का रेशियो आ रहा है ?
  



ई समाचार चैनलवा सब एकसकिलुसिव के चक्कर में का का करता है बेचारा,
आज के फ़ैसला पर रिपोर्टिंग करने ,रामलीला मैदान पहुंची आजतक पत्रकारा



एक ठो नेताजी दिन में बघार बघार के अपना चतुराई का राग का रहे थे ,
पडा जो सोटा पाछे से , कहे हम तो संविधान का प्रावधान बता रहे थे ...



NCTC पर ममता दीदी , घनघोर से, पुरज़ोर की हैं विरोध ,
Nहीं ,Cचलेगा Tरिनमूल Congग्रेस ,फ़ुल फ़ार्म बता दिया लोग  





किरकेट में रोजिन्ना हार की खबर काहे बार बार दिखाते हो ,
हॉकी में आया फ़ार्म में भारत , अबे एक बार नहीं बताते हो ...



चुनाव आयोग नोटिस ले ले के आ भेज भेज के इत्ता बढा दिया दबाव ,
कानून मंतरी बोले ,होगा आचार संहिता उल्लंघन कानून में ही बदलाव ॥



शेषन बाबा ने दी थी आग्नेय दृष्टि , अब उ हो गया है भैंगा ,
रोजिन्ना देता आयोग नोटिस नया , नेताजी रोजे दिखाते ठेंगा ..



 हम जीतेंगें , सरकार बनेंगे , सबके हैं अपने अपने दावे ,
कौन लाएगा काला धन वापस , कौन जनलोकपाल , हाय कोई नहीं बतावे





सहवाग के पीठ में दर्द कल नय खेलेंगे,बता रहा है टीभी वाला है भकलोल रे ,
अबे असली खबर ई है ,भारत दागा सिंगापुर के खिलाफ़ टोटल पंद्रह गोल रे 





बिहार में शिक्षा व्यवस्था , बिल्कुल हो गई है ठीक ,
बस मा स्साब बनने की परीक्षा में पर्चा हो गया लीक ...



 मौसम महीना आया बौराने का , कल से सुरताल में फ़कीरा गाएगा ,
रे फ़ागुन आ गया अंगना मोरे ,कल से जोगी फ़िर , जोगीरा गाएगा ...


रविवार, 12 फरवरी 2012

झपकी भी नींद सरीखी लगती है .......









गूगल सर्च इंजन द्वारा लिया गया चित्र , साभार




छोटी सी झपकी भी नींद बडी लगती है , हाय कि अब तो सपने भी नहीं आते ,
जिंदगी ने दायरा इतना कर दिया छोटा , अपने इस दायरे में कई अपने भी नहीं आते .
 
सुनो , जो अब भी न बोले तो , कल सोचेगा ये कि , आज क्यूं ,हम मौन हैं ,
लोकतंतर माने भारत है यदि , और जो हमारे हैं ये प्रतिनिधि तो फ़िर हम कौन हैं
 
तुम्हारे गीतों वो खुमारी कहां है , और बोलो में वो नशा कहां है ,
जाओ ये फ़ैसला तुम्हीं पर छोडा , बता दो , दर्द कहां और दवा कहां है ..
 
तुम देखना कोई न कोई यूं बयान ये भी कर जाएगा ,
अब कोई फ़ांसी नहीं होगी , आएगा जब महाप्रलय , कसाब खुद मर जाएगा 
 
इस देस का लोकतंतर , ससुरा हो गया रंगीला ,
माननीय लोग सदन में देख रहे सिलेमा नीला
 
जल की कमी पर सरकार ने चेताया ,
आ टोटल नदी सबको कूडाघर बनाया 
 
ये जो अब रातों को नींद नहीं आती ,कसूर ये सारा हालात का है ,
आधा दिन कटता नौकरी आधा चाकरी में , वक्त अपने पास बस रात का 
 
यूं न समझना कि रातों में भी हम खामोश बैठे हैं ,
चेत जाएं वो , जो हमारे से होकर भी कुछ ज्यादा ऐठे हैं
 
खुर्शीद बाबू चुनाव आयोग के दोषी दिए गए करार ,
इलेकसन का मौसम है , अबे समझा करो कुछ यार ....
 
दिल्ली में ठंड ने पिछले तीस साल का रिकॉर्ड तोडा ,
चल तू भी जोर आजमा , गरीब को हाय , किसी ने न छोडा ..
 
प्रनब दादा बोले हैं , अभी मुश्किलों से पूरी तरह बाहर नहीं हुआ है देस ,
एकदम्मे ठीक , विश्व के नक्शे से ही बाहर कर दो ,इत्ते लगाओ इसको ठेस
 
राहुल पीएम पद के लिए नहीं हैं लालायित, पिरयंका गांधी फ़रमाई हैं ,
आयं , अबे तो फ़िर काहे के लिए , फ़ुल फ़ैमिली विद मम्मी मैदान में आई हैं ,

चलते चलते एक खुशखबरी भी दे दें आपको

दो दीवाने शहर में , ढूंढते थे एक आशियाना ,
बसेरा हो गया आखिर ,मिल गया अपना ठिकाना

मुद्दतों बाद जाकर , हम भी एक स्थाई पते वाले हो गए जी ........
 
और फ़िर हाल कुछ ऐसा हुआ कि ,

पिछले एक हफ़्ते से घर को बसाने सजाने में गज्ज्ब बैंड बजा है ,
मगर सच मानिए , अपने घर में खटने खटाने का अपना ही मजा है ,

और हम ले भी रहे हैं भरपूर ..आहिस्ता आहिस्ता

बृहस्पतिवार, 2 फरवरी 2012

बेबाक , बिंदास , बेलौस ,बेसाख्ता सी कुछ बातें ......



बिखरे आखर


ट्विटर सेंसर को तैयार , गूगल ने किया इनकार ,
उपयोग दुन्नो का अईसा करें , रहे टेंसन में सरकार




मेरे इर्द गिर्द रहकर , तुम जो यूं , अपना ये वक्त बर्बाद करोगे ,
मुहब्बत हो जाएगी मुझसे , मेरे जाने के बाद ,बहुत याद करोगे
 
छन्नो मलिक भी स्वयंवर रचाने को हो गईं तैयार ,
रखिया ,ललिया के बाद , देखिए ई किनका फ़ोडेंगी कपार ...
 
टेस्ट में भारत की शर्मनाक हार हो गई तय ,
ले बिल्लैया , अबे अब बचा का है रे , अब काहे का भय 
 
महासचिव राहुल : भ्रष्टाचारी कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ,
महापालटी कहती है , खबरदार ,जो लूट के नहीं कमाएगा ...
 
शहरों में , सालाना बढ रहा है डेंगू का पिरकोप ,
उधर मच्छर लगा रहे हैं मोर्टीन में मिलावट का आरोप ...
 
भारत को चाहिए युवा नेता ,पिरधान जी फ़रमाए हैं,
इसीलिए पालटी वाले , पैंतालीस का कुंवारा अजोध युवा लाए हैं ...
 
चुनाव आयोग :रिश्वतखोरी के खिलाफ़ अध्यादेश लाए सरकार ,
हायं , ई चुनाव आयोग के मन में आ रहे हैं कैसे कैसे विचार ...
 
राजनीति से संन्यास लेने पर विचार कर रहे हैं शरद पवार ,
बिल्कुल ठीक , किरकेट टीम लडे चुनाव , सरद जी अब किरकेट खेलें यार
 
टेनिस में गौरवान्वित हुए और किरकेट से हुए शर्मसार ,
खेल खेल में फ़ेल हुआ , खेल बना व्यापार , रे देख तेल की धार 
 
दौर हम ये भी देख लेंगे , कि जब कितने ही दौर देख लिए ,
वो सितम पे सितम ढाती रही ज़िंदगी , हमने सितम और , कुछ और देख लिए
 
अबे कहां हो कोसने वालों , मचाओ स्यापा कि , मुद्दे कुछ दफ़न हो गए ,
जो अब भी सोना ही चाहते हो तो तान लो चादर , जगाने के तुमको बहुत अब जतन हो गए ...
 
बहुत मुश्किलों से भी हो कभी तो उस काम में मजा आता है ,
बहुत खूब बजता है अब भी जब ईमानदारी का कोई हथौडा बजाता है .....
 
वो इस कदर आश्वस्त हैं इस बारे में कि ,कभी कुछ नहीं बदलेगा ,
जो न बदला तो मिट जाएगा , या अभी बदलेगा या फ़िर नहीं बदलेगा ..

वसंत ने फ़िर दस्तक दी , हवाओं ने भी मिज़ाज़ बदला है ,
हम भी सोच रहे थे ये मन बौराहा ,यूं बेवजह नहीं मचला है ......

दुनिया और दुनियादारी , बेशक , हम दोनों के लिए खराब हो गए ,
कमबख्त, इतना बिखरे रहे, आखरों के बीच कि किताब हो गए
 
माया के करीबी हैं पॉन्टी , मॉल के बेसमेंट में मिली तिजोरी ,
अबे टोटल हथिया का पेट खोल के देखो ,मिलेगा वहां भी नोट का बोरी ...
 
भ्रष्टाचार के प्रति उच्च न्यायालय का रुख हो रहा है बेहद सख्त ,
भ्रष्टाचार के विरूद्ध विधायिका ,कानून बना के पस्त ,कार्यपालिका कर कर के मस्त ..
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