
एक बार एक गधा एक बड़े से गड्ढे में गिर गया। धोबी देखता है कि गड्ढा काफी गहरा है और उसमें से गधे को निकालना मुश्किल है फ़िर चूँकि वो बूढा भी हो चुका है इसलिए अच्छा है कि इस गड्ढे के ऊपर मिटटी दाल कर उसे बंद कर दे और उसकी जान छूटे। वो गड्ढे में मिटटी डालने लगा ।पहले तो गधे के समझ में कुछ नहीं आया । मगर जब उसे समझ में आया है तो वो दुखी भी हुआ और चकित भी । फ़िर अचानक ही गधे को कुछ सूझा , जैसे ही धोबी उसके ऊपर मिटटी डालता वो अपने आप को हिला कर उस मिटटी को झाड़ लेता और उस मिटटी पर चढ़ जाता। इस प्रकार धीरे धीरे गधा ऊपर आने लगा। उस धोबी के आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा जब उसने देखा कि गधा धीरे धीरे ऊपर आकार बाहर निकल जाता गया । कहने का मतलब ये कि
जीवन में इस तरह सबके ऊपर बहुत सारी मुश्किलें मिटटी के तरह आ पडती हैं जिन्हें झाड़ते हुए और उनके ऊपर कदम रखते हुए जो आगे और ऊपर चढ़ता जाता है वो हर मुश्किल से बहार निकला जाता है। गधे तुझे सलाम......
अब एक लघुकथा
बचत

लीना और टीना शौपिंग मॉल में खरीददारी कर रही थी।
पर्स का दाम सुनकर लीना ने टीना से कान में चुपके से कहा , टीना , यार ये तो खुल्लम खुल्ला लूट रहे हैं इस पर्स का बाहर किसी भी दुकान में इससे आधा ही होगा, रहने दे चल निकल यहाँ से।
टीना ने उसे फुसफुसा कर समझाया , क्या बोल रही है तू, पागल अब जो है ले ले , ऐसी जगह पर कोई मोल भाव करता है क्या कितनी शर्म आयेगी।
सो पर्स खरीद लिया गया ।
मॉल से बाहर निकलते ही दोनों सहेलियां एक रिक्शा करने लगी,
बड़े चौक का कितना लोगे भाई,
जी मेम साहब दस रुपैये लगेंगे।
अरे जाओ जाओ वहां के तो आठ ही लगते हैं, हम तो रोज़ जाते हैं।
जी बीबीजी, मगर ये भी तो देखिये की कितनी तेज धुप है।
चलो चलो आठ में चलना है तो बताओ।
ठीक है बीबीजी, चलिए।
"देखा ये रिक्शे वाले बदमाश होते हैं, बचा लिए न दो रुपैये, लीना से टीना ने कहा.
ये हुई न बचत ????