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प्रचार खिडकी

बुधवार, 30 जनवरी 2008

अब बने हम सुपर मार्केट , हम किडनी बेचते हैं

जैसे ही मैंने ये खबर देखी कि हमारे यहाँ पर कुछ बडे बिजनेस मैन पैदा हुए हैं जो यहाँ पर बहुत बडे पैमाने पर kidnee का अंतर राष्ट्रीय कारोबार करते हैं। मेरा मन ख़ुशी से बाग़ बाग़ हो गया। अजी चलती रहे दुनिया भर में mandee का दौर , होता रहे अमेरिका और इंग्लैंड का बेदा गद्क और चाहे कितनी ही बार हमारा दलाल स्ट्रीट डूब जाये , मगर मुझे पूरा यकीन हो गया है कि जब तक इस तरह के किडनी के दलाल हमारे यहाँ पर मौजूद हैं हम दुनिया भर के लिए सबसे बडे सुपर मार्केट बने rahenge। ama इससे badh kar भी कोई produkt हो saktaa है kisi देश के पास bechne के लिए। तो bhaiyaa काहे कि चिंता है phir , vyarth की है toubaa क्यों मचा रखी है भी लोगों।

वैसे भी हम तो शुरू से सबसे अनोखे उत्पाद बेचने के लिए मशहूर हैं भैया। देखिए बहुत साल पहले हमारे यहाँ से लोगों को ले जाकर बेचा जाता था videshon में मजदूरी करने के लिए , यानी हम अपने यहाँ के प्राणी बेचते थे। समय बदला और हम भी पढ़ लिख kar इन्तेल्लेजेंट हो गए तो हम कहाँ मानने वाले थे हमें अपना स्तातास बदला और हम अपना टैलेंट बेचने लगे। हमारी कद्रदानी देखिए कि हमें भी और हमारे टैलेंट को भी बिल्कुल ब्रांडेड उत्पाद की तरह खारेदा गया।

अजे, ये तो हुई इंपोर्ट और एक्सपोर्ट की बात । खरीदने बेचने में तो हमारा अपने देश में भी लाजवाब रेकोर्ड है। हम अपनी इमानदारी, खुद्दारी, अपना इमान , अपनी इज्ज़त यहाँ तक कि अब तो हमारे कई महान लोग अपनी बहन बहू और बेटियों तक को बेझिझक बेच रहे हैं। सबसे बडे फख्र की बात तो ये है कि इनके खरीदार भी हमें कहीं तलाशने की जरूरत नहीं होती वो भी हमारे अपने ही लोग हैं। और हाँ इसके लिए ना तो कोई सेंसेक्स है na ही किसी का कोई कोंत्रोल बिल्कुल फ्री मार्केट है भैया।

चलो भाई लोगों , अब अपनी , अपने अंगों की , अपने मान समान, इमान, अपमान, जिन्दगी और maut तक की कीमत लगाओ और मेज़ से बिजनेस करो । क्यों सही कहा ना.

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