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प्रचार खिडकी

शुक्रवार, 18 जनवरी 2008

सिर्कोजी बन गए सिरदर्द

हाँ भैया, ये भारत की राजनीती की भी अजीब अजीब मुसीबतें हैं । अब देखिए ना इस साल गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर फ़्रांस के राष्ट्रपति हमारे मुख्य अतिथि हैं । हैं तो हैं , मगर मुसीबत तो ये है कि उनके साथ उनकी पत्नी नहीं बल्कि उनकी ताजी प्रेमिका आ रही हैं। और यही बात तो सबसे बडे दुविधा की है । हमारे अधिकारी हमारे मंत्री और हमारी सरकार तक परेशान हो गयी है कि यार ये तो कभी सोचा ही नहीं था नहीं तो पत्नी वाली सभी जगह पर एक एक्स्ट्रा ओप्शन की गुंजाईश छोड़ देते । अब सब के सब इस सारकोजी के सिरदर्द यानी इनकी प्रेमिका कार्ला को किसी कोलेरा बीमारी की तरह भागेने के चक्कर में हैं।

मगर मुझे ये समझ नहीं आता कि भाई इसमें बुराई क्या है। एक बात बताइये आज जब पूरा देश पूरे देश की जनता , पूरे देश के लाखों परिवार, पूरा महिला समाज बडे मजे से सारे धारावाहिक ( जिसमें सभी में कोई भी ऐसा पुरुष और महिला नहीं हैं जिसके कम से कम चार पांच चक्कर नहीं हैं ) देख रहे हैं , ना सिर्फ देख रहे हैं बल्कि पसंद कर रहे हैं हज़म कर रहे हैं तो इसका मतलब तो यही हुआ ना कि किसी को कोई ओब्जेक्शुं नहीं है। और फिर हे सरकार और उसके अधिकारियों इस देश की परम्परा रही है अतिथि देवो भव , तो भए देव कभी कभी देवी के बगैर अपने दरबार की किसी अप्सरा के साथ आ गए तो इसमें बुराई क्या है यार।

2 टिप्‍पणियां:

  1. सही कह रहे हैं । वे गाती भी बहुत अच्छा हैं ।
    घुघूती बासूती

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  2. achha bhaiyaa ghughuti jee,
    unke gane ke bare mein to hamein pataa hee nahin thaa.

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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