इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

प्रचार खिडकी

बुधवार, 31 अक्तूबर 2007

अपने बच्चे संभालो भैया

अपने बच्चे संभालो भैया,
बाद में ना शिकवा करना,
समय रहते ही जागो,देखो,
बडे बूढों का है कहना॥


बच्चे हो गए हैं तेज़,
काटे कान बाप के,
चाहे पडोसी के हों,
या हों खुद आप के॥

इनके प्रश्न बिल्कुल ,
बम जैसे फट जाते हैं,
पूछे जब ,पापा ,
बच्चे कहाँ से आते हैं।

हर पल इनका साथ निभाना,
होमवर्क में हाथ बटाना,
मोबाइल कंप्यूटर को इनके,
भूलकर भी ना हाथ लगाना॥

बेटे की girlfriend और बेटी का boyfriend,
कभी ना पूछना ,उनका नाम,
जो पूछा तो जवाब मिलेगा,
रखो अपने काम से काम॥

नस्ल आज की सुपर स्टार,
बनना चाहे सिने स्टार,
पढाई, लिखाई और नौकरी ,
छोडो बेकार की बातें यार॥


autocracy, और पॉलिटिक्स,
ये बेकार के tuntey हैं,
बाईक मोबाइल और मस्ती,
चलते चौबीस घंटे हैं॥

मगर क्या करें बच्चों का,
नहीं ये सारा दोष है,
स्टाइल और status में,
जब माँ बाप मदहोश हैं॥

जो करना है करो सभी,
बस एक बात का ख्याल रहे,
पैसा, शोहरत ,ऐश,हो ना हो,
इज्ज़त बची हर हाल रहे...



झोल टन माँ
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Google+ Followers