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प्रचार खिडकी

शनिवार, 9 अप्रैल 2011

अनशन खत्म : आंदोलन शुरू ....अन्ना का आह्वान ..तैयार हैं न आप ?

आंदोलन का जयघोष



आज अन्ना हज़ारे का आमरण अनशन समाप्त हो गया है और उनके साथ ही पिछले पांच दिनों से भूखे प्यासे बैठे तीन से चार सौ आम लोगों ने भी अन्न और जल ग्रहण कर लिया । इससे पहले कि इस जनांदोलन पर कुछ बात की जाए , यहां उन लोगों के लिए कुछ कहना चाहूंगा जो न सिर्फ़ अब इस आंदोलन पर सवाल उठा रहे हैं और उनके लिए भी जिन्हें लग रहा है कि इस आंदोलन को अभी और परवान चढने देना चाहिए था और इसे इतनी जल्दी खत्म नहीं होने देना चाहिए था ।

सबसे पहले तो ये स्पष्ट कर देना उचित होगा कि ये आंदोलन न तो सत्ता के खिलाफ़ था न ही सरकार के ,न ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध लडाई थी न ही व्यवस्था को उखाड फ़ेंकने जैसा कोई प्रयास । इस आंदोलन का एक मकसद था । पिछले बहुत समय से सरकार द्वारा प्रस्तावित लोकपाल विधेयक को पारित नहीं करवाया जा सका था बावजूद इसके कि अब तक आठ बार इसकी कोशिश की गई । इससे अहम बात ये कि जिन लोगों पर इस लोकपाल विधेयक के मसौदे को तैयार करने का भार डाला गया था और जैसा मसौदा प्रस्तावित था उससे उसका वैसा ही हश्र होने वाला था जैसा कि आज भ्रष्टाचार से लडने के मौजूद कानूनों और संस्थाओं का है आपके सामने मुख्य सतर्कता आयोग  का उदाहरण है ही ।

इसलिए जब इस प्रस्तावित मसौदे को जांचा परखा गया तो सिविल सिटिजन के रूप में सजग और कार्यरत कर्मवीर सूचना के अधिकार की लडाई को लड कर जीतने वाले अरविंद केजरीवाल , अन्ना हज़ारे , किरन बेदी , प्रख्यात कानूनविद प्रशांत भूषण , शांति भूषण  जैसे लोगों ने कमर कस ली कि अबकि बार सरकार की मनमानी नहीं चलने देंगें । समाजसेवी आंदोलनकारी अन्ना हज़ारे ने बरसों पुराने और आज़माए अचूक नुस्खे को फ़िर से आज़माया और इस मांग के साथ बैठ गए । जो लोग इसे जल्दी खत्म हुआ मान रहे हैं या ये कह रहे हैं कि अन्ना को अभी इसे ज़ारी रखना चाहिए था उन्हें दो बातें ध्यान में रखनी चाहिए थीं । जनता का हुज़ूम और उसका जोश जिस तरह से पल प्रतिपल बढता जा रहा था वो अगर इसी तरह बढता रहता तो बहुत जल्दी ही वो समय भी आ जाता कि जब आम आदमी शायद वो सारी सीमाएं पार कर जाता जो इस आंदोलन के लिए सोचा भी नहीं गया था । हालात तभी तक काबू में थे जब तक कि अन्ना की तबियत ठीक थी .सरकार को ये भलीभांति अंदाज़ा हो गया था कि अगर जरा सी भी चूक हुई तो ये आत्मघाती साबित होगी ।


ये अनशन तो कल रात ही समाप्त हो जाता क्योंकि कल रात दस बजे हुए समझौते में ही सरकार ने अन्ना की सारी मांगे मान ली थीं लेकिन कुछ खास कारणों से अन्ना ने आज सुबह तक का इंतज़ार किया । एक तो थी सरकारी घोषणा यानि नोटिफ़िकेशन की प्रतीक्षा जिसे सरकार ने बिल्कुल अप्रत्याशित रूप से चौंकाते हुए सीधा राजपत्र ही ज़ारी कर दिया और स्पष्टत: बता दिया कि कमेटी का गठन कैसे किया जाएगा और कौन कौन लोग होंगें । अन्ना एक और खास वजह से रुके हुए थे ..आज सुबह अन्ना ने अपने अनशन को और इस आंदोलन को समाप्त करने से पहले ये जता और बता दिया कि अभी सिर्फ़ ये अनशन समाप्त हुआ है और सच कहें तो उसे एक तात्कालिक स्थगन मात्र दिया गया है ।


अन्ना ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर पंद्रह अगस्त तक सरकार ने इस विधेयक को पारित नहीं किया तो फ़िर वही जंतर और फ़िर वही मंतर । अन्ना ने आज दिए गए अपने संदेश में ये भी बता दिया कि अब तो सही मायने में ये आंदोलन शुरू हुआ है इस आंदोलन की अलख अब पूरे देश में जगानी होगी और वे खुद इसमें भागीदारी करेंगे । अन्ना ने युवाओं को मीडिया को और आम अवाम को संदेश देते हुए सरकार को ये ईशारा कर दिया है कि उनके निशाने पर अब कौन कौन से एजेंडे रहेंगे , चाहे वो वोटिंग मशीन हो या चुनाव प्रणाली , प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार हो या सत्ता का विकेंद्रीकरण उन्होंने भविष्य के लिए उद्देश्य भी तय कर दिए हैं और तरीका भी । 


सबसे बडी बात जो इस पूरे प्रकरण से निकल कर आई है वो ये कि न सिर्फ़ आम जनता को उसकी ताकत का एहसास करा दिया उन्होंने बल्कि सरकार को भी बता दिया है कि बेशक वे जनप्रतिनिधि हैं और जनता ने हैं और जनता ने ही उन्हें चुन के भेजा है लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं कि वे मनमानी करेंगे और अब ये कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि सिर्फ़ पांच सवा पांच सौ लोग पूरे सवा अरब की जनसंख्या को दिनरात बेवकूफ़ बनाकर बेखौफ़ घूमते रहेंगें । तो ये समय वो समय है कि जब सही मायने में नागरिक आंदोलन की शुरूआत हो गई है जिसका एक ही उद्देश्य है नागरिक राज की बहाली , जनता का राज जो वो खुद करते हुए महसूस कर सके , जब जिससे उकताए उसे निकाल के बाहर कर सके , जो भी दोषी हो उसे दंड दे सके , अब आप खुद तय करिए कि इस आंदोलन में आपकी भूमिका क्या होने वाली है क्योंकि आपको एक तरफ़ तो होना ही होगा या तो उन हाथों के साथ आइए और उस लायक खुद को बनाइए कि ये जो सोटे तैयार किए जा रहे हैं उन्हें चलाने की ताकत आपमें खुद आ जाए नहीं तो फ़िर अपनी पीठ को इस बात के लिए तैयार रखिए क्योंकि देर सवेर ये आप पर भी पडने ही वाला है ...ये फ़ैसले का समय है इसलिए जागिए ...और जुडिए ..

10 टिप्‍पणियां:

  1. आज शर्मनाक भ्रष्टाचारियों के भ्रष्टाचार से सड़ते देश व समाज के हालात को देखते हुए सबसे उचित प्रश्न ...

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  2. संगठित जनता के बिना जनतंत्र का कोई अर्थ नहीं। जनता के संगठनों का निर्माण आरंभ किया जाए।

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  3. आपने बिल्कुल सही विवेचना की है। आपकी एक एक बातों से मैं अक्षरशः सहमत हॅु।

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  4. शुरूआत तो हो चुकी है,
    अब ये तो हमारे ऊपर है कि हमे क्या करना है।

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  5. अन्ना और उनके साथियों के प्रयास, संघर्ष और जज्बे को सलाम.... जनता के समर्थन और जज्बे को देखकर लगता है कि अब लोगों में भ्रष्टाचार के प्रति जागरूकता बढ़ रही है.... मेरा मन्ना है कि भर्ष्टाचार हमारे अन्दर से ही शुरू होता है, और जब तक आम जनता खुद इससे पीछा नहीं छुटाएगी, तब तक यह ज़हरीले सांप की तरह डसता ही रहेगा.... हम चाहते हैं कि दुसरे ठीक हो जाएं और हम वैसे के वैसे ही रहें.... दुसरे संघर्ष करें, भूख हड़ताल करें और हम बस दो शब्दों से उनकी वाहवाही करके इतिश्री पा लें.... इससे कुछ नहीं होने वाला... बल्कि बदलाव हमारे खुद को बदलने के प्रयास से ही आएगा...

    अन्ना ने शुरुआत की है, यह हर एक के लिए अपने अन्दर के बदलाव का एक बेहतरीन समय है... उम्मीद है शब्दों से आगे बढ़कर यह बात दूर तलक जाएगी...

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  6. शुरुवात करने वाले ने तो कर दी है अब हमें सोचना है की हमें क्या करना है बस !

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  7. जहाँ चारों ओर भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का अँधेरा गहराता जा रहा था... इस आंदोलन ने रौशनी की किरण दिखाई है... जिस तरह से जनता जाति, धर्म, स्टेटस, सब कुछ भुला कर जुनून की हद तक इस मुद्दे पर एक हुई है वह रोमांचित करने वाला है. इस मुहिम में मीडिया ने जैसी सक्रियता दिखाई वह निश्चित रूप से सराहनीय है.

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  8. भ्रष्टाचारियों के मुंह पर तमाचा, जन लोकपाल बिल पास हुआ हमारा.

    बजा दिया क्रांति बिगुल, दे दी अपनी आहुति अब देश और श्री अन्ना हजारे की जीत पर योगदान करें

    आज बगैर ध्रूमपान और शराब का सेवन करें ही हर घर में खुशियाँ मनाये, अपने-अपने घर में तेल,घी का दीपक जलाकर या एक मोमबती जलाकर जीत का जश्न मनाये. जो भी व्यक्ति समर्थ हो वो कम से कम 11 व्यक्तिओं को भोजन करवाएं या कुछ व्यक्ति एकत्रित होकर देश की जीत में योगदान करने के उद्देश्य से प्रसाद रूपी अन्न का वितरण करें.

    महत्वपूर्ण सूचना:-अब भी समाजसेवी श्री अन्ना हजारे का समर्थन करने हेतु 022-61550789 पर स्वंय भी मिस्ड कॉल करें और अपने दोस्तों को भी करने के लिए कहे. पत्रकार-रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना हैं ज़ोर कितना बाजू-ऐ-कातिल में है.

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  9. अन्ना हजारे जी के साथ अब हजारो लोग हे. अब हजारे जी की अन्नागिरी जरुर चलेगी.

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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