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प्रचार खिडकी

मंगलवार, 17 जनवरी 2012

सिर्फ़ दो पंक्तियां




खाक कर देती है सियासत को , जब अवाम ,एक बार इस पर आमादा होती है ,
तुम्हें यकीन हो न हो , जाम में पैदल आदमी की रफ़्तार सबसे ज़ियादा होती है 
 
मैं आम आदमी हूं , हर जगह नज़र आऊंगा ,
खबरदार सियासत , अब मैं भी उधर आऊंगा 
 
मशीन से हो गए हैं , अब क्यूं ये जीवन ,जीवन सा नहीं लगता
जब से टूटे मिट्टी के झोंपडे , गांव का आंगन भी , आंगन सा नहीं लगता
 
एक दोस्त पूछते हैं अक्सर , अमां तुम्हारे लिखने का ,कहीं कुछ है भी असर ,
हा हा हा हा अबे क्या तुम्हें अब बताएं , सियासत तक की लगी है , यहीं पर नज़र
 
ऑस्ट्रेलिया ने भारत को एक पारी और 37 रन से हराया ,
अबे यहीं खेला करो , और जीतो हमेसा , कित्ता था समझाया .
 
सियासतदानों ,तुम महफ़ूज़ थे अब तलक , क्योंकि हर बार तुम्हें हमने माफ़ किया ,
चलो अब आज़माते हैं ज़ोर अपना अपना , कहना जो अबकि नहीं तुम्हारा पत्ता साफ़ किया ..
 
तिलमिलाओ , और बौखलाओ इतना कि , सियासत को भी कुचल डालो ,
हम नहीं रुकने वाले ,इसलिए ,नहीं बदेगा कुछ ,वाली मानसिकता को बदल डालो ..
 
बदल डालो वो सारे कानून , जो उन्हें आम से खास कर देते हैं ,
चलो बनाओ जनता का कानून , सब मिल के इसे पास कर देते हैं
 
मैं जानता हूं तुम समझते हो ,हम जनता हैं ,हमें भूलने की बीमारी है,
सुलगेंगे तो खाक कर देंगे तुम्हारी सल्तनत , हम राख में छुपी चिंगारी हैं
 
बदरा के ओटवा से ताके रे सुरुजवा ,सर सर चले रे हवा जान मारे रे ,
लठिया जो देखे , हाथ ,जनता जनार्दन ,नेतवा के कईसे देखो प्राण कांपे रे 

कालाधन का इस्तेमाल रोकने को आयोग कटिबद्ध है ,
और काले धन के इस्तेमाल को , हर दल प्रतिबद्ध है ......
 
तुम ये बता दो बस ,तुम सबके चोले , सबके माने सबके , इतने दागी क्यों हैं ,
तुम तलाशो जवाब पहले ,फ़िर हम भी बता देंगे , तेवर हमारे ये ,बागी क्यों हैं .
 
अभी पढी एक हकीकत ,चलिए लगे हाथ आपको भी ,ये बता देते हैं ,
आबादी नहीं है कई देशों की उतनी , जितने लोग अपने देश में सडकों पे जान गवां देते हैं 
 
जब भी छाए उदासी या मायूस होने लगो ,यादों को टटोल लेना ,
मुस्कुराहटों , सपनों , की पोटलियों को धीरे से खोल देना .....
 
आज की खबर है कि पाक में तख्ता पलट की आशंका ,
लो बहुत हो गया पिरजातंत्र का नाटक , शुरू फ़ौज का हो गया टंटा
 
इतनी बेकरारी सनम अच्छी नहीं , अभी तो अंगडाई ली है ,
जरा सो तो लें पलक भर , फ़िर बताएंगे सपने में जिंदगी कैसी दिखाई दी है ......
 
राहुल खोलेंगे विधानसभा चुनाव में ,नसीमुद्दीन के भ्रष्टाचार की पोल ,
ए बेटा , ऊ सब तो ठीक हऊ , कभी कुछ कांग्रेसिया घोटाला पर भी बोल .....
 
परदा है ,परदा है ,परदा है परदा ,पर्दे के पीछे हाथी खडा है ,
देखो रे चुनाव की माया , हाथी खडा है ,मगर तिरपाल में पडा है 
 
अबे हेलमेट पहन के रहा करो ,ये चेहरों पे कालिख मलने का दौर है ,
खुद कोलतार लिए खडी है सियासत , तुम समझते हो कोई और है ....
 
कंगारुआ सब धो धो के, पिच पर रहा है सबको पटक ,
अबे अब नय बोल रहे हो , अब लगेगा महाशतक ....

हुर्रर्रर्रर्रर्रर्रर्र ..भक्क भक्क भक्क
 
चुनाव में काले धन पर सतर्कता, जांच एजेसिंयों की पैनी नज़र ,
चल्ल बे , स्विस का खाता दिखता नहीं , काहे तब होती , भैंगी नज़र

चलो देखते हैं कि इस बार अपने नज़रबट्टू से इन बज़रबट्टू को कैसे धरते हो
 
 

11 टिप्‍पणियां:

  1. ajay bhaai mushayra lut liya bhaai ab to in bikhre aakhron ko chori kr sine se lgaane ko ji chahta hai bhtrin lekhn bhtrin alfaaz bs mujhe to prshnsa ke liye nshbd hi nhin mil rahe maafi chahta hun me ise chori kr bina aapki svikrti ke mere blog pr sheyr krne ka dussahs kr rhaa hun ..........akhtar khan akela kota rajsthan

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  2. अख्तर भाई इस ब्लॉग पर आने के बाद मेरा कुछ नहीं है सब आपका ही है जहां चाहे ले जाएं । शुक्रिया आपका जो आपको बात अच्छी लगी

    उत्तर देंहटाएं
  3. बदल डालो वो सारे कानून , जो उन्हें आम से खास कर देते हैं ,
    चलो बनाओ जनता का कानून , सब मिल के इसे पास कर देते हैं
    लायर साहब , एकदम सटीक :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. अबे हेलमेट पहन के रहा करो ,ये चेहरों पे कालिख मलने का दौर है ,
    खुद कोलतार लिए खडी है सियासत , तुम समझते हो कोई और है


    भाई क्या घुमा के मारा है. जय हो.

    उत्तर देंहटाएं
  5. पूरी सच्चाई बयाँ कर दी ....वो भी सिर्फ दो पंक्तियों में ....
    बधाई !

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. हर किसी को अपनी लेखनी में लपेट लिया ...बहुत खूब

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  8. मैं आम आदमी हूं और नेता मुझे आम समझ कर चूस रहे हैं!!!!!!

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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