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प्रचार खिडकी

सोमवार, 6 जून 2011

पिटा तेरा जनार्दन , पीटने वाल जनता जनार्दन है ...











जनता जनार्दन है ,हर वक्त रहती है इम्तहानों में ,
संसद में लुटता है लोकतंत्र , और पिटता है मैदानों में ..

वो जो रातों को खुद चुपके से करते हैं प्रहार ,
उन्हें दिन के उजाले में रक्षक कैसे मान लें यार ..

सत्ता में बैठे , हुक्मरानों से कह दो ये खुलेआम ,
हमेशा भारी पडता है बस आदमी एक आम .....


कब तलक चला सकोगे यूं , ये दौर बेहयाई का ,
अब तो वक्त भी आ गया , तुम्हारी जूतों से पिटाई का ..


अन्ना , बाबा , जनता ने रूप अब कई लिए हैं धर ,
सोच लो क्या हो जो हर एक अपनी पे आया उतर ....


दबाओ , झुकाओ , उठाओ , कर के देख लो अपनी हर तरकीब ,
अब जनता तैयार है ,खुद ,लिखने को सत्ता का नसीब ...........


अब हर मिनट , है क्रांति , हर दिन एक आंदोलन है ....
पिटा तेरा जनार्दन , पीटने वाल जनता जनार्दन है ...


29 टिप्‍पणियां:

  1. दबाओ , झुकाओ , उठाओ , कर के देख लो अपनी हर तरकीब ,
    अब जनता तैयार है ,खुद ,लिखने को सत्ता का नसीब ...........

    लिखो ,लिखो खूब नसीब लिखो...जिस दिन कोई गरीब किसी अमीर का नसीब लिखेगा...दास्ताँ भी न होगी दास्तानों में !

    भाव अच्छे हैं,स्वभाव में गरमाहट बनाये रहो !

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  2. अजय भाई, जनभावनाओं का मार्मिक और वास्तविक चित्रण। यह लड़ाई जनता की है और तमाम अन्ना तमाम बाबा अभी निकल कर आते ही रहेंगे।

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  3. नसीब में जिसके जो लिखा वह उसकी पीसी में काम आया .
    अभी तो यह अंगड़ाई है आगे बहुत लड़ाई है वाह रे जूता...

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  4. ये सब खबर देख-पढ़ के भगवान को धन्यवाद करती हूँ की उन्होंने मुझे हिन्दुस्तान से बाहर भेज दिया. शर्म आती है अब तो ...

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  5. " लगा दे मेरे भाई ...ये हरामी इसी के लायक है " ..बहुत ही करारी पोस्ट ..अजयभाई आपकोतहे दिल से सलाम सर "

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  6. बहुत सही..
    जनभावनाओं को आपने जगह दी अपनी चर्चा में, आपका शुक्रिया !
    शर्म आती है अब तो ...
    क्या आपने मेरा लेख पढ़ा है ?
    घूंघट में सन्यासी और वह भी दाढ़ी वाला

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  7. आज काँग्रेसी सोते हुए बुरा सपना भी देखते हैं तो चौंक कर भाजपा आर एस एस की साजिश करार देने लग जाते हैं... नपुंसक सरकार का ज़मीर जूते की दवाई से भी खड़ा होने वाला नहीं है

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  8. जय जनता जनार्दन--------दे दना दन दन

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  9. खुलने लगी है अब धीरे धीरे सबकी पोल

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  10. जनता जनार्दन को पिटते हुये छोद भागने वाले बाबा। सब की खूब पोल खुली इस बहाने लेकिन वही आपकी बात पिटना फिर भी जनता को ही पडा।

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  11. वह क्या बात लिखी है आपने !अपना महत्वपूर्ण टाइम निकाल कर मेरे ब्लॉग पर जरुर आए !
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  12. दिग्गी, कपिल, पुलिस कर्मचारी,
    ये सब ताड़न के अधिकारी।

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  13. अरे यार जड देता दो चार तो उस की आवाज दुर तक जाती, क्यो रुक गया था, पता हे यह लातो के भुत हे बातो से नही मानेगे, वर्ना बाबा की बात मांन लेते....

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  14. बहुत ही सही लिखा आपने .....अब सामी आ चुका है ...जहां खी भी ये दिखे इनसे जबाब मांगो और नहीं देने पर धो डालो ...

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  15. दुतरफा चीरहरण जारी है ..
    आपने शब्दों के ज़रिये उसे एक बढ़िया रूप मे रखा.

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  16. अजय कुमार झा जी ,आपकी लेखनी में आंच है ,प्रासंगिकता है ,चेतावनी है ,फटकार है ,ललकार है .सह -भावित हम सभी ब्लोगिये हैं आपके भाव -अनुभाव के .

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  17. सही कहा है। विचारोत्तेजक प्रस्तुति।

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  18. लीगल सैल से मिले वकील की मैंने अपनी शिकायत उच्चस्तर के अधिकारीयों के पास भेज तो दी हैं. अब बस देखना हैं कि-वो खुद कितने बड़े ईमानदार है और अब मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर ही एक प्रश्नचिन्ह है

    मैंने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर श्री बी.के. गुप्ता जी को एक पत्र कल ही लिखकर भेजा है कि-दोषी को सजा हो और निर्दोष शोषित न हो. दिल्ली पुलिस विभाग में फैली अव्यवस्था मैं सुधार करें

    कदम-कदम पर भ्रष्टाचार ने अब मेरी जीने की इच्छा खत्म कर दी है.. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें मैंने जो भी कदम उठाया है. वो सब मज़बूरी मैं लिया गया निर्णय है. हो सकता कुछ लोगों को यह पसंद न आये लेकिन जिस पर बीत रही होती हैं उसको ही पता होता है कि किस पीड़ा से गुजर रहा है.

    मेरी पत्नी और सुसराल वालों ने महिलाओं के हितों के लिए बनाये कानूनों का दुरपयोग करते हुए मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज करवा दिए..मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं थोड़ी बहुत पूंजी अपने कार्यों के माध्यम जमा की थी.सभी कार्य बंद होने के, बिमारियों की दवाइयों में और केसों की भागदौड़ में खर्च होने के कारण आज स्थिति यह है कि-पत्रकार हूँ इसलिए भीख भी नहीं मांग सकता हूँ और अपना ज़मीर व ईमान बेच नहीं सकता हूँ.

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  19. सोयी हुयी मासूम जनता को जो अंधेरों का सहारा लेकर मारते हैं वो 'कायर' शब्द को परिभाषित करते हैं। बहुत सटीक और सामयिक प्रस्तुति।

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  20. अब हर मिनट , है क्रांति , हर दिन एक आंदोलन है ....
    पिटा तेरा जनार्दन , पीटने वाल जनता जनार्दन है ...
    Ye sapne sakaar ho jayen to kya baat hai....aameen!

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  21. मेरा बिना पानी पिए आज का उपवास है आप भी जाने क्यों मैंने यह व्रत किया है.

    दिल्ली पुलिस का कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें. मैं नहीं मानता कि-तुम मेरे मृतक शरीर को छूने के भी लायक हो.आप भी उपरोक्त पत्र पढ़कर जाने की क्यों नहीं हैं पुलिस के अधिकारी मेरे मृतक शरीर को छूने के लायक?

    मैं आपसे पत्र के माध्यम से वादा करता हूँ की अगर न्याय प्रक्रिया मेरा साथ देती है तब कम से कम 551लाख रूपये का राजस्व का सरकार को फायदा करवा सकता हूँ. मुझे किसी प्रकार का कोई ईनाम भी नहीं चाहिए.ऐसा ही एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है. ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें. मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा.

    मैंने अपनी पत्नी व उसके परिजनों के साथ ही दिल्ली पुलिस और न्याय व्यवस्था के अत्याचारों के विरोध में 20 मई 2011 से अन्न का त्याग किया हुआ है और 20 जून 2011 से केवल जल पीकर 28 जुलाई तक जैन धर्म की तपस्या करूँगा.जिसके कारण मोबाईल और लैंडलाइन फोन भी बंद रहेंगे. 23 जून से मौन व्रत भी शुरू होगा. आप दुआ करें कि-मेरी तपस्या पूरी हो

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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