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प्रचार खिडकी

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

कुछ बेतरतीब से , छिटके , भटके ....कुछ बिखरे आखर





पिछले दिनों मन अशांत रहा और शायद उद्वेलित भी , जाने किन किन रौ में बहता हुआ क्या कुछ लिखता रहा , कहीं स्टेटस के रूप में तो कहीं किसी टिप्पणी के रूप में , देखिए आप भी ,






लो फ़िर दे गया आदेश किसी को , कोई पाकिस्तानी आका ,
अजमल , अफ़ज़ल , को ज़िंदा रखो , करें रोज़ शहर में धमाका


राजा , कलमाडी , मोझी , रेड्डी , और आज गए अमर ,
अजब देश की गजब कहानी , जेल में अब सिर्फ़ नेता आते नज़र .
 
 
 
बहिन जी का जुत्ती आया , धर के हवाईजहाज ,
विकीलीक्ज़ को आगरा भेजो , खोल दिहिस सब राज़ ...
 
 
 
 
आजकल बस एक ही बात , इकदूजे से ,पूछें जेल के संतरी ,
कित्ता स्कोर हो गया टोटल , अबे कितने आ गए मंतरी ...
 
 
 
लो फ़िर दे गया आदेश किसी को , कोई पाकिस्तानी आका ,
अजमल , अफ़ज़ल , को ज़िंदा रखो , करें रोज़ शहर में धमाका ...
 
 
 
कै ठो नयका प्रपोजल ले के ,पिरधान जी,चले थे ढाका ,
रूठ के ममता बैठ गईं , लुट गए मोहन काका ...
 
 
 
अमर जी मांगे थे छूट , रे हमरी एक किडनी है फ़ेल ,
अदालत बोली , एक किडनी वाले भी जा सकते हैं जेल .....
 
 
 
तुम कमज़ोर , हो कायर भी , निर्दोंषों को छुप कर देते मार ,
तुम निश्चिंत , तुम बेफ़िक्र , क्योंकि फ़िर बचा लेगी सरकार ,
आम आदमी ही बस क्यों रहता , निशाने पर हर बार ,
कभी उन्हें भी मौत दो , जो देते तुम्हें हथियार ......
 
 
कोई घडियाली टसुए बहा रहा होगा , 
क्या किया , क्या करना है , बता रहा होगा ,
कल वही , उसी हैवान की बगल में , 
किसी ज़ेल में भी , कहकहे लगा रहा होगा 
 
 
 
अब क्यों सुनें और क्या सुनें तुम्हारी ,
तुम्हारी ही सुन कर तो इतने जीवन बर्बाद हुए ,
अबे छोडो , हर बार वही बकवास करते हो , तुमसे तो,
नए जुमले भी अब तक नहीं ईज़ाद हुए .




पिरधान जी पिरेसान थे , केतना सताया टू जी ,
ये जी जी की आदत गले पडे ,अब आ गए हू जी













12 टिप्‍पणियां:

  1. आतंकवाद का समूल नाश हो, कैसे भी?

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  2. आतंकवादी आज तक नाकाम हैं और इंशा अल्लाह आगे भी नाकाम ही रहेंगे।
    आतंकवादी बस धमाके कर सकते हैं लेकिन आपस में नफ़रत नहीं फैला सकते।
    यह काम हमारे और आपके पास में रहने वाले शैतान करते हैं। आतंकवादी जिस मिशन में नाकाम रहते हैं हर बार , ये इंसानियत के दुश्मन उन्हें कामयाब करने की हमेशा कोशिश करते हैं।
    हमेशा ये लोग विदेशी आतंकवादियों को गालियां देने के नाम पर पूरे विश्व में और भारत में बसे एक विशेष समुदाय और उसके धर्म को गालियां देते हैं ताकि प्रति उत्तर में सामने वाला भी गालियां दे और उनके पूरे समुदाय से नफ़रत करे।
    यह इनकी चाल होती है।
    विदेश के जिस खाते से विदेशी आतंकवादियों को डॉलर मिलते हैं, आप चेक करेंगे तो उसी खाते से इन देसी वैचारिक बमबाज़ों को भी डॉलर मिलता पाएंगे।
    अंग्रेज़ दो टुकड़ों में भारत को पहले ही बांट गए थे और तीसरे के बंटने के हालात पैदा कर गए थे और साथ ही अरूणाचल समस्या भी अंग्रेज़ों की ही देन है।
    उन्होंने ऐसा इसलिए किया था ताकि भारत हमेशा अशांत बना रहे और उन्हें अपना जज बनाकर उनसे फ़ैसले कराता रहे और नये नये आंदोलनों के फ़ैसले मानवाधिकार के नाम पर करते हुए वे इसे और छोटे छोटे टुकड़ों में बांटते चले जाएं और इसका नक्शा बिल्कुल ऐसा हो जाए जैसा कि मुसलमानों के आने से पहले था। हज़ारों छोटे छोटे राज्य और उनके ख़ुदग़र्ज़ शासक।
    खिलाफ़त का ख़ात्मा अंग्रेज़ों ने इसीलिए किया और उसे बहुत से छोटे छोटे टुकड़ों में बांट कर रख दिया और सारे अरबों को अपने सामने बेबस और कमज़ोर बना दिया।
    एक सशक्त एशिया अंग्रेज़ों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
    भारत हो या पाकिस्तान, दोनों ही जगह बम धमाके हो रहे हैं तो इसके पीछे दोनों का साझा दुश्मन है।
    वह दुश्मन कौन है ?
    उसे पहचानिए और उसका उपाय कीजिए और एशिया में आबाद लोगों को प्रेम का संदेश देते हुए अपनी शक्ति बढ़ाते हुए चलिए।
    मौजूदा दौर में करने का काम यही है ,
    ...और इसी के साथ जो मुजरिम किसी लालच में या नफ़रत में अंधे होकर बम धमाके कर रहे हैं, उनकी सुनवाई अलग अदालतों में तेज़ी से की जाए और ईरान की तरह मात्र 3 दिनों मे चैराहे पर क्रेन में लटका दिया जाए और उसका वीडियो पूरी दुनिया को दिखाया जाए कि हमारे यहां आतंकवादी का हश्र यह होता है और तुरंत होता है और यही हश्र उन वैचारिक आतंकवादियों का भी होना चाहिए जो किसी के धर्म, समुदाय और महापुरूषों को गालियां देकर नफ़रत फैला रहे हैं क्योंकि ये आतंकवादियों से भी बदतर हैं।
    आतंकवादियों ने इतने भारतीयों की जान आज तक नहीं ली है जितने लोगों को ये बलवाई दंगों में मार चुके हैं। देश को बांटने वाले दरअसल यही हैं और चोला इन्होंने देशप्रेम का ओढ़ रखा है।

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  3. सुन्दर . सब राजनितिक असफलता और अनिर्णय की स्थिति के करण है.

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  4. जब मन व्यथित होता है और हम कुछ कर नही पा रहे होते तो ऐसे ही उदगार उठते हैं।

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  5. bikhare aakharon ne vyangya ke vo baan chalaye hain ki kaun bache aur kis par pade ginane men der lagegi lekin kas kas ke mare hain sharmdar to padh hi nahin payenge vaise honi chahie koi vyavastha ki jail men bhi unhen padhaya jaay ve mahanubhav ab kis bhav bik rahe hain.

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  6. आपके बिखरे आखर बहुत कुछ कह गए...इधर तो भटके मन के छिटके भावों का दम ही घुट जाता है...

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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