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प्रचार खिडकी

बुधवार, 17 सितंबर 2014

जो भी हुआ , सरेआम हुआ है




तेरे ही रहे चर्चे पिछले दिनों , सुना बडा नाम हुआ है ,
हथकंडे चलते रहे थे जहां ,अबकि फ़ैसला-ए-अवाम हुआ है ॥


हर रोज़ लिखे जाते हों कानून के नए मसौदे जहां ,
काट दे थानेदार चालान बीवी का , लोगों ने कहा बडा काम हुआ है ॥


सुनो व्हाट्सअप को ही दुनिया मानने समझने वालों ,
आउटडेटेड होकर इन सबका , बस एक सा अंजाम हुआ है ॥


लल्लन चौकीदार के पास भी अब एंड्रॉयड है ,वाई फ़ाई के साथ ,
ससुरा कंप्यूटर बना मोबाइल ,समझिए तो चिनिया बदाम हुआ है ॥


ये वो दौर है, जब बस्तियां जला कर ,वो रौशनी चाहते हैं ,
देखेंगी तबाही,जाने कौन सी नस्लें ,किस्सा कई बार यूं तमाम हुआ है ॥


वो जो कुदरत है , बेपर्दा, बेशर्म , बेगैरत और बेदर्द सी ,
कहर बरपाया कयामत बनके टूटा ,जो भी हुआ , सरेआम हुआ है ॥


देश की राजनीति करवटें बदल रही है अंगडाइयां लेकर ,
तुम देखते जाओ कि देश बदल के दिखाएंगे , अभी तो शुरू काम हुआ है ॥



यार तू तो आया था आगे , लडने लडाई हर आदमी आम की ,
बस उंगलिया उठाते दूसरों पर , धत तू भी अब इक आदमी आम हुआ है ॥




बाज़ार को आदत पड गई थी सीढियों सी चढने की धपाधप ,
कैलकुलेटर में नई बैट्री डली तो, अबे पेट्रोल का भी कम दाम हुआ है ॥



नदी पहाडों और जंगलों के बीच पला बढा  हुआ देश इक ,
दूर हुआ इतना , वो बदले पे उतारू , अब मचा कोहराम हुआ है ॥

3 टिप्‍पणियां:

  1. हर शब्द अपनी दास्ताँ बयां कर रहा है आगे कुछ कहने की गुंजाईश ही कहाँ है बधाई स्वीकारें

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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