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प्रचार खिडकी

बुधवार, 23 अप्रैल 2014

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है







हम जानते हैं तुम जिस देस के वासी हो ,
उस देश को अर्से से इस खेल का चाव है ,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है ॥

बडे भोले हो ओ बाउजी , फ़न्ने बने फ़िरते हो ,
वो पपलू बनाए जा रहे हैं ,पप्पू सा स्वभाव है ,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है

साला मुर्गा टंगा है उलटा अस्सी रुपए में,
एक किलो टमाटर  होता सौ का भाव है ॥

दिल थाम के बैठना  सामने चुनाव है॥

न साले घोषणा बंद करते हैं न बोलना ही ,
गरीब के मेनिफ़ेस्टो में अब भी वडा पाव है,

दिल थाम के बैठना  सामने चुनाव है॥


बडे जिगरे वाले बनते हो लकतेजिगर बे ,ऐसा क्या ,
उत्ता तो कलेजा ही बडा नहीं,जित्ता बडा कलेजे पे घाव है ॥

दिल थाम के बैठना  सामने चुनाव है ॥

कभी कूका करते थे मोर पपीहे बागों में, अबे होंगे ,
आजकल हर बाग में उल्लू कौवों की कांव कांव है,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है ॥

इहां पब्लिक का लुटिया गोल है खटते पिटते,
मुदा हाकिम के थर्मामीटर में ,ताप का बढाव है ,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है

जरा पूछ के देखिए डोरेमॉन से , यही कह है केनिची से,
बेशक जीजा हमें " एक्सीडेंटल" मिले , दीदी में ठहराव है

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है

हर किसी के पास है , किसी ने छुपा रखी है आस्तीनों में ,
तो कोई मूंछों पे टिका के एक छप्पन ,दे रहा ताव है

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है

7 टिप्‍पणियां:

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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