इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

प्रचार खिडकी

शनिवार, 24 सितंबर 2016

सुनो लड़कियों ,तुम यूं न मरा करो ..





सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,

हत्या कर दो ,
या अंग भंग ,
फुफकार उठो ,
डसो ज़हर से,
बन करैत,
बेझिझक ,
बेधड़क ,
प्रतिवाद ,
प्रतिकार ,
प्रतिघात , करा करो


सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,


तुम मर जाती हो ,
फिर मर जाती हो ,
मरती ही जाती हो ,
मरती ही रहती हो ,
कभी गर्भ में ,
कभी गर्त में ,
कभी नर्क में ,
दुनिया के दावानल में
तुम यूं न जरा करो ,



सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,


मोमबतियां जलाएंगे ,
वे सब ,
खूब जोर से ,
चीखेंगे चिल्लायेंगे ,
मगर ,
खबरदार , जो
भरम पाल बैठो ,
बीच हमारे ही ,
से कोइ हैवान ,
फिर से ,
फिर फिर ,
वही कर उठेगा ,
वो नहीं आयेंगे ,
मरते मरते तो कह दो उनसे ,
तुम यूं न गिरा करो ,


सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,

14 टिप्‍पणियां:

  1. एक सार्थक संदेश देती रचना फिर भी बंद होगा ये ताण्डव ?

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. पता नहीं रेखा जी बंद होगा या नहीं , किन्तु लड़कियों का आत्मविश्वास तो बढेगा , यही सबसे जरूरी है | प्रतिक्रिया देने के लिए आपका आभार और शुक्रिया

      हटाएं
  2. प्रतिरोध
    प्रतिघात
    प्रतिकार
    ये भी होता है
    लेकिन फिर भी
    हैवानियत का तांडव
    भला कहाँ बंद होता है ।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. हाँ यही तो अफ़सोस है संगीता जी कि कहीं से भी रुकता नहीं जान पड रहा है लेकिन कहीं न कहीं से किसी न किसी को शुरुआत तो करनी ही होगी न

      हटाएं
  3. खून खौलने लगता है सोचकर ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. तुम्हारे यूँ मर जाने से बात खत्म हो जाती है
    तुम संहार करो,
    अधिकांश लोग तुम्हें तब भी राक्षसी कहेंगे
    लेकिन तुम स्वयम अपने भीतर की दुर्गा पर नाज करोगी

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रतिक्रिया और स्नेह के लिए आभार दीदी

      हटाएं
  5. हैवानियत का तांडव
    भला कहाँ बंद होता है

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. सच कहा संजय ये बदस्तूर जारी है अब भी

      हटाएं
  6. असलियत तो ये है की हम जानवरों से भी अधिक जंगली और हिंसक हो गए हैं

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. अफ़सोस मगर सच यही है संजय | प्रतिक्रया के शुक्रिया और आभार आपका

      हटाएं
  7. गहरे भाव ... कठोर सच्चाई है ...

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Google+ Followers