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प्रचार खिडकी

बुधवार, 14 नवंबर 2007

मोबिलीताईतिस

उस दिन अचानक मित्र के साथ एक अनजान युवक को देखा तो थोडी हैरानी हुई । कारण था कि उसके गर्दन एक तरफ को झुकी हुई थी। मैंने सोचा कि बेचारा भरी जवानी में कैसी बीमारी झेल र्दहा है। उत्सुकतावश मित्र से पूछा तो उसने बताया कि उसे मोबालीताईतिस हो गया है।

मैं सकपकाया, ये कौन सी बीमारी है यार, क्या ये भी विदेशों से आयी है ?

अरे नहीं, नहीं, यार मोबलीताईतिस तो शुद्ध अपने देश के बच्चों की खोज है। देख आजकल तुने अक्सर बाईक पर,कारों में, यहाँ तक कि रिक्शों पर भी लोगों को गर्दन को एक तरफ जुकाए , कान से मोबाईल चिपकाए बातें करते देखा होगा। धीरे धीरे जब यही क्रिया आदत बन जाती है तो वह कहलाता है मोबालीताईतिस।

मजे कि बात तो ये है कि इसकी रोकथाम के लिए हँड्स फ्री कित नामक उपकरण उपलब्ध है , मगर चूँकि ये फैशानाब्ले रोग है इसलिए उसका इस्तेमाल कोई नहीं करता। अलबत्ता इस रोग का एक साइड एफ्फेक्ट रोड एक्सीडेंट के रुप में सामने आया है।

सबसे अहम बात ये कि हमारी इस खोज पर विश्व चिकित्सा जगत भी जल्भुन गया है क्योंकि लाख कोशिशों के बावजूद उनके यहाँ मोबईलीताईतिस का ये फैशोनाब्ले वाईरुस नहीं पहुंच पाया है।

" कमाल है यार "मेरे मुँह से सिर्फ इतना निकला.

5 टिप्‍पणियां:

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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