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प्रचार खिडकी

रविवार, 9 दिसंबर 2007

उफ़ ये क्रिकेट कथा

इस देश में कुछ न कुछ ऐसा चलता रहता है कि मन करता है कि अब तो साल के ३६५ दिन, २४ जानते कमेंट्री करने वाला संजय (महाभारत के लाईव कमेंटेटर ) टाईप कमेंटेटर चाहिए होगा। यार खेल तो खेल ये बोर्ड और इसे चलाने वाले ब्लैक बोर्ड महारथी भी गुलातियाँ मार-मार कर क्रिकेट को ख़बरों में रखते हैं। कभी कोच, कभी कैप्टेन कभी खिलाडियों के एड पर नाराजगी तो कभी सेलेक्टर के कोलौमं लिखने पर पाबंदी।


अभी पवार साहब , वेंग्सर्कार साहब पर बिगड़ गए। उनका कहना था कि भाई आप सेलेक्टर हैं तो कोलौमं नहीं लिख सकते , ये आपका मुख्य काम नहीं है।

इस संबंध में मुझे सिर्फ दो बातें कहनी हैं पहली वेंगसरकर साहब से- अजी कर्नल साहब ,छोडिये कोलौमं-शोलौमं का झंझट, अजी आप भी हमारी तरह ब्लोग लिखिए। दूसरी बात पवार साहब के लिए- " सर जी , कर्नल साहब का मुख्य काम क्रिकेट है कोलौमं लिखना नहीं , बिल्कुल सही फरमाया आपने। मगर हुज़ूर फिर आपका भी मुख्य काम तो पोलिटिक्स में गंद फैलाने का है। तो महाशय , वहीं पर ये फैलाये ना, क्रिकेट जगत से आपका क्या लेना-देना। तो जब आप यहाँ घुसे हुए हैं तो कर्नल से कोलौमं के कनेक्शन पर ये कोम्प्लैंत क्यों?

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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