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प्रचार खिडकी

रविवार, 11 जुलाई 2010

ये मन बावरा ...........हा हा हा...



बाहें फ़ैलाए ,
आज तो , ऊपर से ,
आती हरेक बूंद को ,

बाहों ,में,
समेट लेने का मन है ............

इस रुत को,
इन हवाओं और ,

फ़िज़ाओं को ,

इन घने काले बादलों को ,
तन से ,
लपेट लेने का मन है .............

बारिश में धुला हुआ,

इक फ़ूल , या ,
की मेंढक के ,
छोटे बच्चे ही सही ,
बारिश में ,

भीगा अपना रूमाल , पोंछने को ,
उन्हें ,किसी रोज़ ,
भेंट देने का मन है ............

आज नहीं भा रहा है ,

कोई फ़ास्ट फ़ूड ,

कोई स्पेशल डिश भी नहीं ,

मुद्दत हुए जो किए ,
आज वैसे ही ,
घर में,
पकौडों के लिए,
बेसन फ़ेंट , लेने का मन है ................



ओह ............ये मन बावरा ..................हा हा हा हा हा .......ये बारिश की बूंदें ........




17 टिप्‍पणियां:

  1. रूमानी भाव
    सुन्दर कविता

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  2. मुद्दत हुए जो किए , आज वैसे ही ,
    घर में, पकौडों के लिए,
    बेसन फ़ेंट , लेने का मन है ...............

    बारिश कम्बख्त क्या क्या न करवाये.. आपके मन पर वारे जाये... काश हमे भी पकौडिया तलना आता!! :।

    उत्तर देंहटाएं
  3. हाय!! बारिश में ये क्या बना रखा है...कुछ लेते क्यूँ नहीं??? :)

    उत्तर देंहटाएं
  4. बेसन के पकोड़े ! वाह अजय जी क्या बात है ,वैसे भी घर के बेसन के पकोड़े में जो स्वाद है वह स्पेसल डिश और फास्ट फ़ूड में तो कभी हो ही नहीं सकता | अच्छी प्रस्तुती ....

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खुब सुरत लगी आप की यह रचना

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया समां बनाया अजय भाई आपने !

    आज तो महाराज, बारिश ने हमारा भी मूड बना दिया...............अभी अभी खाना खा कर उठे है .....अरहर की दाल, चावल और चोखे (उबले आलू ,प्याज़ , हरी मिर्च और सरसों का तेल)के साथ| अब क्या बताये बस मजा आ गया !
    बारिश के मौसम का भी अपना ही एक अलग मज़ा है !

    उत्तर देंहटाएं
  7. बारिश से उत्पन्न एहसासों को बखूबी लिखा है

    उत्तर देंहटाएं
  8. बरखा जिसको बावरा ना बना दे ...!

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  9. वाह वाह्……………………बारिश मे भीगने के अहसासो को बखुबी संजोया है।

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  10. अजय भाई
    बारिश में ही ये कुछ-कुछ क्यों होता है.
    बारिश में कोई नहीं कहता-हम आपके है कौन
    बारिश में दिलवाले अपनी दुल्हिनयां को छत्तरी में छिपाकर ले जाते हैं और फिर पकोड़े खिलाते हैं.

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  11. बारिश हो भी रही है या सिर्फ कविता में ही??? :P लेकिन कविता जोरदार है..

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  12. कविता मे नही अगर सच मे पकौडे बनायें तो हमे जरूर बतायें देखें कि कैसे बनाते हैं धन्यवाद्

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  13. umda kavita..barish ke anubhav ko poori tarh se samet liya ya isme!

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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