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प्रचार खिडकी

शनिवार, 21 अगस्त 2010

हर वक्त ! इश्कियाने को जी चाहता है......अजय कुमार झा

है मौसम का सुरूर ,या
कि तेरी नज़रों का कसूर,
हर वक्त,
इश्कियाने को जी चाहता है .............

या मैं हो जाऊं फ़ना तुझमें ,
या तू ही कुर्बान हो जा,
कयामत तक इसे ही,
आजमाने को जी चाहता है .........

नहीं मुझे परवाह,
अब दुनिया ए दौर की,
तेरी नज़रों से,
खुद को सजाने को जी चाहता है........

मुझे फ़िक्र है दस्तूरों ,
और, बंदिशों की, मगर ,
करूं क्या कि जी ,
बस यही ,और यही चाहता है ........

मैंने कब कहा कि ,
ये कुफ़्र नहीं है , होगा शायद,
ये तो दिल ही जाने ,
कब गलत, कब सही चाहता है ........

इस कमबख्त दिल की,
फ़ितरत ही कुछ ऐसी है,
जो मिलना हो मुश्किल
अक्सर , ये वही चाहता है ........

तैयार है हर दिल यहां ,
कोई उडने को आसमान,
तो कोई भाग चलने को,
इक ज़मीं चाहता है ..............

हा हा हा ...........ये दिल बेइमान ....ये दिल बेलगाम...........ये दिल .......छोडो यार .........हा हा हा ..


28 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह ....क्या कहने अजय भाई ....एक दम ही इश्किया हो रहे है !! लगे रहिये !!

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  2. तैयार है हर दिल यहां,
    कोई उडने को आसमान, तो कोई भाग चलने को,
    इक ज़मीं चाहता है ..

    क्या कहने!

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  3. अजय जी
    आज तो इश्क का सुरूर सिर चढ कर बोल रहा है मगर खूब बोल रहा है……………आपका जुनून तो छा गया आज्………………पढकर दिल बाग बाग हो गया।

    उत्तर देंहटाएं
  4. क्‍या बात है जी...मौसम के ये तेवर और आपकी कविता...आनंद आ गया

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  5. तैयार है हर दिल यहां,
    कोई उडने को आसमान, तो कोई भाग चलने को,
    इक ज़मीं चाहता है ।

    सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

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  6. झा जी क्या बात है!
    मौसम का असर है या और कुछ ....!

    उत्तर देंहटाएं
  7. हा हा हा ...........ये दिल बेइमान ....ये दिल बेलगाम...........ये दिल .......छोडो यार .........हा हा हा ..


    Har Pal Har Jagah Chaye Rahte hain

    उत्तर देंहटाएं
  8. कहिये जी ... इश्क विश्क इस उमर में भी बेईमान हो गया है ?... हा हा हा हा हा हा हा हा

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  9. वाह वाह ....क्या कहने अजय भाई ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर कविता जी,हां भाई आप की उम्र है, ओर मुंछे भी तो शायद इसी लिये सफ़ा चट करवा ली आप ने :)

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  11. है मौसम का सुरूर ,या
    कि तेरी नज़रों का कसूर,
    हर वक्त,
    इश्कियाने को जी चाहता है .............

    रचना तो बहुत सुन्दर है मगर सलाह दूंगा कि कृपया वकालात को भी पूरा समय दे :)

    उत्तर देंहटाएं
  12. दिल भी बन गया है नगर सेवा की बस 'मजाल',
    जो पूछिए गुंजाईश तो कहता 'बस एक और' !

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  13. कीजिये जो जी में आए
    कोई गड़बड़ झाला नहीं है....
    बस ई ध्यान रखिये कहीं बीवी न गाने लगे
    ओ मेरे सनम अब तो मुझे
    जुतियाने को जी चाहता है....:):)
    हाँ नहीं तो..!
    हा हा हा हा....

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  14. वकील साहब,
    आज मौसम बड़ा बेईमान है??

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  15. दिल के जज्बात को बढ़ाते रहिये

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  16. जब से मेकओवर किया है तब से बहक गए हो ....

    :):)...वो ज़मीं ही तो नहीं मिलती ...

    बहुत खूबसूरत रचना ...

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  17. मौसम का मिजाज़ और ये ख्वाहिशें ...
    आसार अच्छे नजर नहीं आ रहे ....
    अच्छी कविता ...!

    उत्तर देंहटाएं
  18. ये दिल बेइमान ....ये दिल बेलगाम...........

    दिल है कि मानता नहीं ..
    बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  19. अजय कुमार झा जी
    नमस्कार !
    हर वक्त, इश्कियाने को जी चाहता है
    अरे भाई , ध्यान रहे…
    अति सर्वत्र वर्ज्यते

    इसलिए चीनी कम !

    मज़ेदार पोस्ट … बधाई !

    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  20. अजय भाई बहुत अच्‍छी कविता है

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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