इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

प्रचार खिडकी

शनिवार, 11 सितंबर 2010

दैनिक पंजाब केसरी में प्रकाशित मेरा एक फ़ीचर

चित्र पर क्लिक करने पर उसे चटका के बडा करके आप उसे पढ सकते हैं । ये शायद २००७ में प्रकाशित हुआ था

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह जी, बहुत सुंदर लगा, धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सार्थक लेख ...कथानक भले ही समाज से लिए गए हों पर उनकी सार्थकता ज़रूर होनी चाहिए ...यही सोच एक फिल्म बनाते समय फिल्म निर्माताओं को सही दिशा दे सकती है ..

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Google+ Followers