इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

प्रचार खिडकी

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

ओह ! वो श्वेत श्याम फ़ोटो का जमाना ...



यूं तो अपने उस पिछले जमाने की बात ही कुछ और थी .....बेशक आज का जमाना भी आगे शायद इसी तरह याद किया जाए ...हालांकि जितनी तेज ये दुनिया भाग रही है उसमें मुझे शक है कि ....आने वाली दुनिया के पास इतना वक्त भी होगा कि नहीं .....मगर इसमें कोई संदेह नहीं कि ...वो जो जमाना था न रेट्रो वाला ...........आहाहा .......सोच सोच के ही मन आनंदित हो जाता है ...उस जमाने के हर बात में ...एक बात थी ..चलिए छोडिए ...।


आज अचानक अपनी कुछ श्वेत श्याम फ़ोटुएं हाथ लग गईं ...तो ध्यान आया कि ..क्या क्रेज़ हुआ करता था फ़ोटुओं का ..। उस समय फ़ोटुओं से जुडी भी एक अलग ही दुनिया होती थी ...और कुछ भयंकर युनिवर्सल टाईप की प्रथाएं थीं .....जैसे कि विवाह के पश्चात ..स्टूडियो जाकर ..सपत्नीक एक फ़ोटो खिंचवाना ....और हां उसकी तीन कॉपी होना जरूरी था .....एक लडके के घरवालों के लिए , एक लडकी के घर के लिए ....और एक जोडे के लिए भी ....। पासपोर्ट साईज़ की फ़ोटो भी बडे चाव से खींची खिंचाई जाती थी ...। और आजकल का डिजिटल जमाना नहीं कि जब मन किया बार बार क्लिक करके खींचते रहे ..सजा संवार के ........जब तक कि थोबडा ..एकदम हीरो हीरोईन सा न दिखे ..। तब तो एक क्लिक और हो गया ....या तो बोलो राम ....या फ़िर पक्का राम राम ।



उन्हीं दिनों की एक फ़ोटो आपके लिए यहां चेपे जा रहा हूं .....देखिए और बताइए कि मैं इसमें कहां हूं ?????




12 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे तो आप सबसे छोटे वाले लग रहे हैं कोने में खड़े हुए ...:)

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  2. sabse handsom jo hai..nazarein jhukaaye hue..aur kaun hoga bhala..kahiye to ..!
    haan nahi to..!

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  3. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  4. जब अदा जी और सोनल जी ने पहचान लिया तो हम मेहनत क्यों करें :-)

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  5. सबसे बड़का लड़का हमारे अजय बाबू हैं। सही कह रहे हैं कि ब्‍लेक एण्‍ड वाइट का जमाना ही कुछ और था।

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  6. सोनल जी सीधे सादे तो सभी हैं.. सबसे लम्बे वाले ही मुझे लग रहे हैं..

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  7. सूरत का मिलान करें तो सबसे बड़े वाले आप लग रहे हैं.




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    टीम हमारीवाणी

    आज की पोस्ट-
    हमारीवाणी पर ब्लॉग पंजीकृत करने की विधि

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  8. उस ब्लैक एंड व्हाइट के ज़माने में जिंदगी में ज्यादा रंग हुआ करते थे.....

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  9. इसी फोटूआ को न चिन्हे थे फेसबुक पर.

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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