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बुधवार, 10 नवंबर 2010

दैनिक विराट वैभव (दिल्ली ) में प्रकाशित मेरा एक आलेख ...अजय कुमार झा

वर्ष २००७ में ,ये आलेख , मेरे उपनाम , अजय रमाकांत ( उन दिनों मैं अजय रमाकांत के नाम से लिखा करता था ) से प्रकाशित हुआ था । आलेख को पढने के लिए उस पर चटका लगा दें , और छवि को और बडा करने के लिए दोबारा चटका दें ,और फ़िर आराम से उसे पढ सकते हैं ।

4 टिप्‍पणियां:

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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