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प्रचार खिडकी

सोमवार, 22 अगस्त 2011

आदमी सियासत को चुभे तेज़ाब की तरह ......




देखिए हर मस्तक तना , हर छाती पे गर्व है ,
हां उनसे कह दो , जनता मनाती आजादी का पर्व है 



फ़ैला दो इस आग को शोलों के सैलाब की तरह ,
कि एक एक आदमी सियासत को चुभे तेज़ाब की तरह ॥






मन में है चोर और नीयत बेइमान , तो जनता के बीच फ़िर जाएं कैसे ,
उफ़्फ़ ये तो इंतहा है उनकी मजबूरी की, घर में भी टीवी चलाएं कैसे .


उतर आए जो बगावत पे , कहो क्या सिर्फ़ हमारी खता है ,
क्या करें , कि लोगों को अब तुम्हारी फ़ितरत का पता है



बनके बारूद ज़र्रे ज़रे पे ,
बिखर जाओ दोस्तों ,
जो रखना है महफ़ूज़ घर को ,
 अब सडकों पे उतर आओ दोस्तों ,
बढाओ आकार और आवाज़ इतनी ,
कि सत्ता जो मूंद भी ले आखें ,
तो भी उसे , तुम नज़र आओ दोस्तों ॥


सियासतदानों , क्या अब भी कोई ,
दुविधा है , या मन में कोई भ्रांति है ।
जाग गई और जान गई ये जनता ,
हर सीने में बगावत , हर सडक पे क्रांति है ॥


संसद सर्वोच्च है , सत्ता है मगरूर ,
तभी , दोनों मान रहे , जनता को मजबूर ,
शुक्र मनाओ सियासतदानों , लोग नहीं हुए हैं क्रूर ,
करने को तो पल भर में कर दें ,नशा तेरा काफ़ूर ॥




सत्ता तेरी कुर्सी का हर पाया हुआ निकम्मा ,
तू एक से परेशान थी , अब तो सारा देश ही अन्ना ॥



बताओ तो कहां हो मंत्री जी , कहां तुम्हारी कार खडी है ,
घर से लेकर सडक तक , लेके अपने सवाल, जनता तैयार खडी है ...


कांग्रेसी भौंकें , बारी बारी , दिग्गी सिब्बल फ़िर तिवारी ,
रे कौन कुकुर काटा था सबको , हो गई बस एक्के बीमारी .................


तुम्हें जनलोकपाल से ऐतराज़ क्या है ,
इतना क्यों डर गए ,ये राज़ क्या है ,
जानते हैं कि परेशान हो गए हो सोच कर,
सोई हुई जनता को हुआ आज क्या है .............

15 टिप्‍पणियां:

  1. आग ऐसी लगी है दिलो में ... ना बुझेगी किसी के बुझाये ...
    मन की अग्नि है आँखों से झलकी ... सर नहीं झुकते है अब झुकाए ...
    अब तो बिगड़े है तेवर सभी के ... निकले सब अपने घर को जलाये ...
    वो जो आंधी के जैसे उठे है ... ना दबेंगे किसी के दबाये ...
    खाई सौगंध सभी ने ... अब "गुलामी" को देंगे मिटाए ...
    ...
    हल्ला बोल ...

    इंक़लाब जिंदाबाद ...

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  2. सरकार ने हमको जगाने का काम किया है,
    चौंसठ सालों से हमने ,केवल आराम किया है !

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  3. फिर धर्म की उपेक्षा है फिर काली ताकतें हावी हैं। फिर कृष्ण का जन्म हुआ है।
    सपरिवार, मंगलकामनाएं ग्रहण करें।

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  4. मैं तो आप के संस्मरणों की प्रतीक्षा में हूँ। पर लगता है अभी भावना तरंगों ने उन्हें रोक रखा है।

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  5. राजनीति और पैसे का खून लगा हो जिनके मुंह , आम आदमी उन्हें चुभता ही है !
    शानदार !

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  6. बनके बारूद ज़र्रे ज़रे पे ,
    बिखर जाओ दोस्तों ,
    जो रखना है महफ़ूज़ घर को ,
    अब सडकों पे उतर आओ दोस्तों ,
    बढाओ आकार और आवाज़ इतनी ,
    कि सत्ता जो मूंद भी ले आखें ,
    तो भी उसे , तुम नज़र आओ दोस्तों ॥

    सटीक आह्वान ... अच्छी प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह जी वाह क्या बात है आज तो छा गये हैं झा जी मैदान मे आ गये हैं……………बेहद उम्दा प्रस्तुति तीखा वार करती हुई बहुत पसन्द आई।

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  8. ab jan jag raha hai kisi ne to jagane ka kam kiya hai...hame ab ye alakh jagaye rakhni hai...sarthak prastuti.

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  9. उतर आए जो बगावत पे , कहो क्या सिर्फ़ हमारी खता है ,
    क्या करें , कि लोगों को अब तुम्हारी फ़ितरत का पता है |
    आवाहन करती सुन्दर रचना |

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  10. बहुत खूब .. आपके इस खास पोस्‍ट से हमारी वार्ता समृद्ध हुई है!!

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  11. अन्ना ....ने पूरे देश को एक कर दिया .....आवाज़ बुलंद कर दी

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  12. anna ne alakh jagayi ab ye hamari jimmedari hai ki hum is alakh ko bujhne na de.....

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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