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प्रचार खिडकी

शुक्रवार, 6 नवंबर 2009

खामोश ! हम वसूली पर हैं (दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित एक व्यंग्य )



दिल्ली पुलिस के असाधारण और इतने कर्मठता से ड्यूटी करने की प्रेरणा से प्रेरित होकर ..एक श्रद्धांजलि टाईप की पोस्ट ..उनके लिये....॥











(चित्र को बडा करने के लिये उस पर चटका लगाएं )

5 टिप्‍पणियां:

  1. हा-हा-हा , जय हो भंडारा सिंह और मूला सिंह की ! बधाई !!

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  2. बहुत ही अच्‍छा लिखा है, बधाई के साथ शुभकामनायें ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर और फिर प्रकाशन के लिये मुबारकबाद

    उत्तर देंहटाएं
  4. हास-परिहास में सीधा सीधा भारी व्यंग्य?
    बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  5. किस्‍सा तो सच्‍चा है

    पर हिस्‍सा कहां है ?

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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