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प्रचार खिडकी

बुधवार, 30 दिसंबर 2009

मैं और मेरी एक दुविधा



अपने हालिया ग्राम प्रवास के दौरान इस बार मन में एक उत्सुकता थी कि इधर कुछ समय से बिहार में विकास की बहती बयार की खूब चर्चा हो रही थी ।सच कहूं तो अपने होशो हवास में पहली बार इतने बडे पैमाने पर यातायात के क्षेत्र में निर्माण होते देख मैं इतराया भी खूब ।हालांकि मेरी इतराहट जब यथार्थ के नुकीले पत्थरों से टकराई तो पूछिए मत (इसका पूरा जिक्र तो मैं अपने दूसरे ब्लोग कुछ भी कभी भी , में तफ़सील से करूंगा ) मगर जब लंबी चिकनी सडकों को देख कर मैं इतरा रहा था , तभी मेरा मोबाईल कैमरा जैसे मुझ से बगावत करके पता नहीं कौन सा सच ढूंढ रहा था । आप तस्वीर देखिए और बताईये कि क्या मेरी दुविधा वाकई ठीक है .............??
क्या मोबाईल कैमरे ने मुझ से कुछ अलग देखा ..........?????


14 टिप्‍पणियां:

  1. बिहार की ऐसी सड़कें किसी सपने को पूरा होते देखने जैसी ही हैं ...वर्ना तो हाईवे का भी ये हाल था कि कई बार ट्रेन छूटने से बचे ....
    आपका मोबाइल कैमरा दगा करते हुए जो दिखा रहा है ...यह हमारे देश की सच्ची तस्वीर है ...जिसे देखने के हम इनते आदि हो चुके हैं के लोगों में अब कोई संवेदना ही नहीं जगाती ...सारी संवेदना तो निरर्थक विषयों में जाकर अटकी है ...!!

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  2. ओह! छोटी उमर, सिर पर वजन और नंगे पैर। इस सड़क से तो सूखी मिट्टी ही अच्छी।

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  3. दुविधा कैसी.
    कहीं तो शुरूआत हुई !
    आने वाला कल आज से बेहतर ही होगा.

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  4. aapke post ne man ko jhakjhora hai!Tasveeren wo bayan karti hain jiske liye shabd kam pad jate hain.
    Bihar badal raha hai. sundar sidhi sarak aur bojhil bachpan hamare vikas ka padav hai jo vartman ki visangati ko darshata hai.
    Aapke post ki tasveeron ne yaad dilaya hai ki hamen lautna hai air laut kar kuchh aisi koshish karni hai ki dosri tasveer itihaas ka hissa ban jaye.

    aapke is sundar post ke liye dhanyavaad.

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  5. यही बच्ची इस राजमार्ग से हो एक दिन गौरवंवित करेगी आपको...वादा!!


    नितिश वाला नहीं..दिल से!!!


    ----


    यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

    हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

    मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

    नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

    वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

    आपका साधुवाद!!

    नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

    समीर लाल
    उड़न तश्तरी

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  6. बच्चे पर है बोझ
    क्योंकि इस देश में नहीं है सही सोच

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  7. पक्की सड़क छोड़कर मिट्टी पर चलती बच्ची की तस्वीर देखकर ख़्याल आया ... संकोच का भाव, एक ग़रीबी का गर्व, एक गंवारपन का स्वाभिमान।
    आपका आलेख पढ़कर मन में आया .. सड़कें बदली हैं .. हालात वही/नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद
    आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  8. मार्मिक मगर समीर जी की भी बात में दम है !

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  9. यह सब तो हमारे देश के नेताओ ओर भर्ष्ट वाद का नतीजा है, इन्हे देख कर शर्म आती है आम जनता को, लेकिन इन लोगो को कोई शर्म नही

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  10. सडक ना भी होती तब भी ये बच्चे ऐसे ही चलते शायद गरीबी कभी इस देश से नहीं जायेगी। धन्यवाद

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  11. इसका भी कल नया और उज्वल होगा विश्वास रखें । सडक देख कर मैं भी खुश हो गई वरना बिहार की सडकों में तो खड्डे ही खड्डे देखते थे ।

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  12. बच्चे पर है बोझ
    क्योंकि इस देश में नहीं है सही सोच

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  13. मार्मिक मगर समीर जी की भी बात में दम है !

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  14. आपका आलेख पढ़कर मन में आया .. सड़कें बदली हैं ..

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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