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गुरुवार, 19 जून 2008

ब्लॉगजगत के एलियन -श्री उड़नतश्तरी जी महाराज पर एक पोस्ट

शुरू-शुरू में जब मैंने अपने चिट्ठों पर लिखना शुरू किया था तो एक अदद टिपण्णी की दरकार रहती थी, इसका ये कतई मतलब नहीं की आजकल दरकार नहीं रहती, मगर उन दनी हम किसी कक्षा में आए नए बच्चे की तरह थे जो कक्षा में मौजूद हरेक सहपाठी से अपनी जान पहचान बढाना चाहता है। ऐसे में इस ब्लॉगजगत के लोग कब कितना टिपियाने आए ये तो याद नहीं मगर धरती, पातळ , आकाश को छोड़कर आसमान के ऊपर से एक अन्तरिक्ष के प्राणी- उड़नतश्तरी जी - हमारे चिट्ठे पर अक्सर अवतरित होने लगे। तब हमारे अल्पबुद्धि मस्तिष्क में दो ही बातें संचारित हुई। पहली ये की- यार, कमाल है हमें टिपियाने जादू के भी, बंधू, एलियन लोग आने लगे, इतने ऊपर लेवल की लेखनी हो गयी, हमारी कमाल है, झा बाबु।

दूसरी ये की यार, कहीं ऐसा तो नहीं की धरती- पातळ में कोई हमारी बात समझ ही नहीं रहा तो बेचारा कोई एलियन उसे अपनी कूट भाषा समझ कर टिपिया रहा हो, अजी लानत है झा जी। खैर हमारे बात पर झाडू मारिये।

जब हमने उस यु , आई, ओ , यानि अन आईदेंतीफाईद ओब्जेक्त को आईदेंतीफाई किया तो आशा के अनुरूप आलूबुखारे, रसगुल्ले, गुलाबजामुन, की प्रजाती के गुलगुले -थुलथुले से एलियन महाशय निकले- उड़नतश्तरी जी। उनका असली नाम समीर सोनी है ये तो मुझे कुछ ही समय पहले पता चला। वैसे अपने मम्मी पापा से अच्छा तो ख़ुद ही उन्होंने अपना नामकरण किया है।

इनकी पोस्टों, इनकी, लेखन शैली, इनकी अनोखी सोच, अद्भुत विचारों के बारे में क्या कहूं। इन्हें पढ़ कर कोई भी समझ सकता है की ये इंसानी शरीर, रंग रूप मगर दिमागी तौर पर किसी एलियन का काम हो सकता है। चाहे गंभीर बात करें या किसी को जूता मारें ( ध्यान रहे की ये जूता मारने से पहले उसे अच्छी तरह भिगो देते हैं ) , बस हर बात में एक तरह का अन्त्रीक्ष्पना टपकता है।

अब टिप्पणियों की बात। जैसा की मैंने पहले ही बता दिया है की ये वो उड़नतश्तरी है जो बगैर किसी ट्रैफिक जाम ,रेड लाईट, में फंसे हर किसी के चिट्ठे पर लैंड करती है। (मेरे यहाँ तो इनकी पार्किंग का आजीवन पास बना हुआ है )। इनकी इस क्रिया की ऐसी प्रतिक्रया होती है की इनकी एक पोस्ट पर इतनी टिप्पणियाँ आती हैं, जितनी हम साल भर पोस्ट नहीं लिख पाते। खुदा खैर करे यदि गलती से भी किसी दिन मेरी रद्दी की टोकरी में इतनी तिप्प्न्नियाँ आ गयी तो यकीन मानिए खुशी के मरे मेरे चिट्ठे का हार्ट फ़ैल हो जायेगा।

जब भी ब्लॉगजगत पर किसी के योगद्दन की चर्चा होगी तो इस मोस्ट आईदेंतीफाईद ओब्जेक्त की टिप्पणियों और उनके साथ नए चिट्ठाकारों को आमंतरण और प्रोत्साहन के संदेश के लिए हमेशा ही याद किया जायेगा। मैंने भी ख़ुद इसी से प्रेरित होकर बहुत लोग को धकिया कर यहाँ इकठ्ठा कर लिया है। हाँ मेरी एक हसरत तो हमेशा से रहेगी की कभी मिले तो इस उड़नतश्तरी को छु कर सहला कर गुदगुदा कर महसूस करूंगा की यार इस बन्दे में के अन्दर क्या क्या भरा पडा है।

आदरणीय उड़नतश्तरी जी , यदि कोई गुस्ताखी हुई हो तो माफ़ कर दें, अपना छोटा समझ कर , और मैं आपसे छोटा हूँ ये तो मैं साबित भी कर सकता हूँ।

अजय
9871205767

17 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा.. मुझे भी उनका कमेंट मिलता था शुरू में और अभी भी मिलता है.. शुरू में जब उनका कमेंट मिलता था तो मुझे पता नहीं था कि ये कौन हैं.. बाद में जब नारद और चिट्ठाजगत को जाना तब जाकर पता चला इनके बारे में.. सबसे आश्चर्य कि बात तो ये है कि उस समय मैं किसी एग्रीगेटर से जुड़ा नहीं था फिर भी मेरे चिट्ठे तक ये कैसे पहूंच जाते थे?? :)

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  2. बिल्कुल सहि कहे झा बाबु. कोइ कोइ ब्लोग पर तो हम लेख पढने से पहले टिप्पणि देखते हैं. अगर वहां उडन तस्तरी जी टिप्पणि डाले हो तो जरूर ऊसको पढता हुं नहीं तो चलते बनता हुं.
    -सर्वेश

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  3. मैं चिट्ठे और टिप्पणियों से पूरी तरह सहमत हूँ।

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  4. bahut achchey!
    badhiya likha hai!
    bina kisi traffic mein fansey---wali baat bilkul un ke naam---udantashtari ko sarthak karti hai--

    udan tashtari ko kis traffic ne roka--lekin unki tippni ko agar apni nayee post par na payen to unke chiththey mein unhen dhundhane lagte hain--ki khaireeyat to hai??

    unka jaaduyee vyaktitav hai---is mein koi shaq nahin--

    aap ki is baat par bahut hansi aaye--यकीन मानिए खुशी के मरे मेरे चिट्ठे का हार्ट फ़ैल हो जायेगा।

    -:D
    likhte raheeeye

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  5. अजय जी समीर जी के इस उड़नतश्तरी नाम से तो शुरू में हम भी confuse होते थे बाद में उनका असली नाम पता चला था।

    और आपने जो भी लिखा है शब्द ब शब्द सही है।

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  6. उड़नतश्तरी का हमारे ग्रह पर नाम है समीर लाल.

    कनाड़ा में रहते है. भारत भ्रमण करते है. पढ़े-लिखे कवि है !! हँसी-मजाक कमजोरी है. लिखने का नशा है. टिप्पणियाँ करने में आनन्द आता है.

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  7. उड़न तश्तरी जी पधारे नहीं। टोरन्टो में अभी उठ कर कुल्ला-मुखारी कर रहे होंगे! या फिर भोर का सपना देख रहे होंगे!

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  8. उड़न तश्‍तरी भाई समीर लाल जी उतने ही अच्‍छे व्‍यक्ति भी हैं जितनी अच्‍छी टिप्‍पणियां करते हैं । सीहोर में उनका सशरीर आगमन हुआ था और सीहोर के लोग उनको अभी भी याद करते हैं । उनका वादा है कि अगली भारत यात्रा में भी वे सीहोर आएंगे ।

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  9. क्या बात है आजकल तश्तरी जगह जगह उड़ रही है ...कबी इस घर तो कभी उस घर .......वैसे हर जगह उसका स्वागत ही होना है......

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  10. सब आप मित्रों का स्नेह है. हम तो बस भरसक प्रयास करते जा रहे हैं और आप सबका प्यार है जो उसे रिक्गनाईज करते हैं. बस, ऐसा ही स्नेह मिलता रहे, यही आशा है.

    बहुत आभार, अजय भाई एवं आप सभी का.

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  11. सही लिखा समीर भाई का हौसला द्रढ है और प्रोत्साहन देने का रीवाज बेहद दीलचस्प है -
    ज़िँदाबाद ...
    समीर भाई की " उडन तश्तरी" -
    - लावन्या

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  12. बिल्कुल सही फरमाया ब्लाग जगत का नवांगंतुक समीर जी की हौसला अफज़ाई को कैसे भूल सकता है।

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  13. कानपुर में जब मैं समीर जी से मिली थी तब उन्होने एक बात कही थी " मंच के कवियों की तो सभी तारीफ करते हैं, "ट्विंकिल ट्विंकिल लिटिल स्टार" कहने वालों नौनिहालों की तारीफ के बाद जो खुशी मिलती है वो अद्भुत होती है।

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  14. aap sab kaa bahaut bahut dhanyavaad. mujhe pehle se hee achhee tarah maloom tha ki udantashtaree se aap sab kitnee mohabbat karte hain, waise main soch rahaa hoon ki ab to mujhe ek ek ke baare mein yun hee likhnaa padegaa, apne nazariye se. aap sabkaa bahut bahut dhanyavaad.

    उत्तर देंहटाएं
  15. अजय जी,
    उड़नतश्तरी जी के इस सहयोग के लिए तो मैं भी उनकी आभारी हूं। मेरे ब्लॉग पर किसी अपिरिचत की पहली टिप्पणी उड़नतश्तरी जी के नाम ही दर्ज है। वैसे मैंने उन्हें पहले भी कई ब्लॉग्स पर पाया था सो जाना पहचाना नाम अपने कमेंट्स में पढ़कर खुशी तो बहुत हुई थी। हालांकि ये नहीं समझ पाई हूं कि वे सिर्फ खानापूर्ति करते हैं या सच में बढ़िया बढ़िया कहते हैं।

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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