इस गैज़ेट में एक गड़बड़ी थी.

प्रचार खिडकी

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

मैं खुद ही खुद को प्यार करने लगा ....


जब लगे,
दुत्कारने,
मुझको सभी,
परित्यक्त ,
सा हर कोई,
व्यवहार करने लगा॥

खुद को,
उठाया,
गले से,
लगाया,
में खुद ,
खुद को,
ही प्यार करने लगा॥

जीता रहा,
जिस दुनिया को,
अपने,
सीने से लगाए,
मुझे अपने से,
दूर जब ये,
संसार करने लगा॥

खुद को,
सम्भाला,
संवारा-सराहा,
स्नेह से,
पुचकारा,
खुद को ही,
लाड करने लगा॥

उसने इतना,
दिया नहीं मौका,
कि उसे,
कह पाता,
मैं बेवफा,
तो खुद ,
आईने में,
अपने अक्स से,
मोहब्बत का,
इजहार करने लगा।

क्या करता सोचा चलो कोई तो होना ही चाहिए प्यार करने वाला तो मैं खुद ही क्यों ???


15 टिप्‍पणियां:

  1. जब तक हम खुद से प्यार करना नहीं सीखते दूसरों से प्यार नहीं कर सकते । शुरुआत यहीं से होती है ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. कोई ये कैसे बताये कि वो तन्हा क्यों है...
    वो जो अपना था कभी.. और किसी का क्यों है...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बडे़ गीले मन से लिखी है ये रचना आपने

    उत्तर देंहटाएं
  4. खुद को,
    उठाया,
    गले से,
    लगाया,
    खुद को गले लगाने की यह खूबसूरत अदा वाह क्या कहने
    मनमोहक शैली के लिये बधाई
    कविता वह सब कुछ कह रही है जिसके लिये इसकी रचना हुई है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही शानदार ....बहुत अच्छा लगा....

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर, शरद जी की बात से सहमत हुं

    उत्तर देंहटाएं
  7. वाह मजा आ गया... खुद से ही क्यों नहीं....

    उत्तर देंहटाएं
  8. क्या बात है अजय भईया , आज तो गजब लिखा है आपने लाजवाब ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. खुद को खुद प्यार करना ही पहला कदम है, सो आपने ले लिया.

    बधाई...

    बहुत सुन्दर!!

    उत्तर देंहटाएं
  10. ्बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...!!
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  11. जिंदगी में बहुत से ही उतार चढ़ाव आते और चले जाते है.... इन सबको को सहन करने के सबसे बड़ी शक्ति आदमी को अपने अंतर्मन से ही मिलती है..... यदि हम सबसे पहले प्यार करना चाहिए तो वह है अपना अंतर्मन.... जो हमारे साथ हर पल रहता है..... जिंदगी की हर मुसीबत से लड़ने की कला सिखाता है.... और यह सब होता है अपने आप से प्यार करने के कारण.... इसलिए आपने ये बहुत ही खूब कहा है.... आदमी को कुछ नहीं तो अपने आप से प्यार जरूर करना चाहिए... कम से कम अन्तर्मन तो हमारा साथ देगा न जीवन के हर मोड़ पर ......

    उत्तर देंहटाएं

टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Google+ Followers