
जब लगे,
दुत्कारने,
मुझको सभी,
परित्यक्त ,
सा हर कोई,
व्यवहार करने लगा॥
खुद को,
उठाया,
गले से,
लगाया,
में खुद ,
खुद को,
ही प्यार करने लगा॥
जीता रहा,
जिस दुनिया को,
अपने,
सीने से लगाए,
मुझे अपने से,
दूर जब ये,
संसार करने लगा॥
खुद को,
सम्भाला,
संवारा-सराहा,
स्नेह से,
पुचकारा,
खुद को ही,
लाड करने लगा॥
उसने इतना,
दिया नहीं मौका,
कि उसे,
कह पाता,
मैं बेवफा,
तो खुद ,
आईने में,
अपने अक्स से,
मोहब्बत का,
इजहार करने लगा।
क्या करता सोचा चलो कोई तो होना ही चाहिए प्यार करने वाला तो मैं खुद ही क्यों न ???
दुत्कारने,
मुझको सभी,
परित्यक्त ,
सा हर कोई,
व्यवहार करने लगा॥
खुद को,
उठाया,
गले से,
लगाया,
में खुद ,
खुद को,
ही प्यार करने लगा॥
जीता रहा,
जिस दुनिया को,
अपने,
सीने से लगाए,
मुझे अपने से,
दूर जब ये,
संसार करने लगा॥
खुद को,
सम्भाला,
संवारा-सराहा,
स्नेह से,
पुचकारा,
खुद को ही,
लाड करने लगा॥
उसने इतना,
दिया नहीं मौका,
कि उसे,
कह पाता,
मैं बेवफा,
तो खुद ,
आईने में,
अपने अक्स से,
मोहब्बत का,
इजहार करने लगा।
क्या करता सोचा चलो कोई तो होना ही चाहिए प्यार करने वाला तो मैं खुद ही क्यों न ???
जब तक हम खुद से प्यार करना नहीं सीखते दूसरों से प्यार नहीं कर सकते । शुरुआत यहीं से होती है ।
जवाब देंहटाएंआपसे सहमत हूं।
जवाब देंहटाएंसुन्दर अभिव्यक्ति ।
जवाब देंहटाएंकोई ये कैसे बताये कि वो तन्हा क्यों है...
जवाब देंहटाएंवो जो अपना था कभी.. और किसी का क्यों है...
बडे़ गीले मन से लिखी है ये रचना आपने
जवाब देंहटाएंखुद को,
जवाब देंहटाएंउठाया,
गले से,
लगाया,
खुद को गले लगाने की यह खूबसूरत अदा वाह क्या कहने
मनमोहक शैली के लिये बधाई
कविता वह सब कुछ कह रही है जिसके लिये इसकी रचना हुई है.
बहुत ही शानदार ....बहुत अच्छा लगा....
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर, शरद जी की बात से सहमत हुं
जवाब देंहटाएंवाह मजा आ गया... खुद से ही क्यों नहीं....
जवाब देंहटाएंक्या बात है अजय भईया , आज तो गजब लिखा है आपने लाजवाब ।
जवाब देंहटाएंखुद को खुद प्यार करना ही पहला कदम है, सो आपने ले लिया.
जवाब देंहटाएंबधाई...
बहुत सुन्दर!!
्बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...!!
जवाब देंहटाएंआभार
sharad ji sahi kah rahe hain unse poorntah sahmat hun.
जवाब देंहटाएं....बहुत खूब, प्रसंशनीय रचना!!!
जवाब देंहटाएंजिंदगी में बहुत से ही उतार चढ़ाव आते और चले जाते है.... इन सबको को सहन करने के सबसे बड़ी शक्ति आदमी को अपने अंतर्मन से ही मिलती है..... यदि हम सबसे पहले प्यार करना चाहिए तो वह है अपना अंतर्मन.... जो हमारे साथ हर पल रहता है..... जिंदगी की हर मुसीबत से लड़ने की कला सिखाता है.... और यह सब होता है अपने आप से प्यार करने के कारण.... इसलिए आपने ये बहुत ही खूब कहा है.... आदमी को कुछ नहीं तो अपने आप से प्यार जरूर करना चाहिए... कम से कम अन्तर्मन तो हमारा साथ देगा न जीवन के हर मोड़ पर ......
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