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प्रचार खिडकी

शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

लिव इन रिलेशनशिप : क्या तैयार है समाज (नई दुनिया में प्रकाशित मेरा एक आलेख )

नई दुनिया भोपाल संस्करण में दिनांक ,9/11/2009, को प्रकाशित एक आलेख


(आलेख को पढने के लिए उस पर चटका लगा दें )

12 टिप्‍पणियां:

  1. रचना जी ,
    चित्र के ऊपर चटका लगाएं तो वो बडा होकर खुल जाएगा यदि उसके बाद भी दिक्कत हो तो ctrl + + से और बडा किया जा सकता है , छवि इससे बडी करने से पोस्ट में नहीं लोड हो सकती थी और शायद प्रति ,,थोडी अस्पष्ट है मगर पढी जा सकेगी ...असुविधा के लिए खेद है ..

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  2. मैंने पढ़ा,अच्छा आलेख,बधाई झा जी.

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  3. सार्थक लेख लिखा अजय जी ! अभी दो दिन पहले ही मैं अमेरिका की एक खबर अपने घर वालो को दिखा रहा था जिसमे एक भारतीय मूल की नायिका, जिसने अभी-अभी एक बच्ची को जन्म दिया, और डेल कंप्यूटर के मालिक के छोटे भाई ने उसका बाप बनने की घोषणा की!

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  4. आप ने इस विषय पर सुंदर लिखा
    होली की आप को ओर आप के परिवार को बहुत बहुत बधाई

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  5. Wah bhaia.. badhaai ho..
    इस बार रंग लगाना तो.. ऐसा रंग लगाना.. के ताउम्र ना छूटे..
    ना हिन्दू पहिचाना जाये ना मुसलमाँ.. ऐसा रंग लगाना..
    लहू का रंग तो अन्दर ही रह जाता है.. जब तक पहचाना जाये सड़कों पे बह जाता है..
    कोई बाहर का पक्का रंग लगाना..
    के बस इंसां पहचाना जाये.. ना हिन्दू पहचाना जाये..
    ना मुसलमाँ पहचाना जाये.. बस इंसां पहचाना जाये..
    इस बार.. ऐसा रंग लगाना...
    (और आज पहली बार ब्लॉग पर बुला रहा हूँ.. शायद आपकी भी टांग खींची हो मैंने होली में..)

    होली की उतनी शुभ कामनाएं जितनी मैंने और आपने मिलके भी ना बांटी हों...

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  6. होली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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