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बुधवार, 7 अप्रैल 2010

सानिया मुद्दा इज द रियल मुद्दा : आज हरिभूमि में प्रकाशित मेरा व्यंग्य

                                         व्यंग्य को बडा करके पढने के लिए उसके उपर चटका लगाएं या औन लाईन पढने के लिए यहां जाएं        

7 टिप्‍पणियां:

  1. एक दम दुरुस्त लिखा है। मैंने भारत पाकिस्तान के रिश्ते पर उस दिन लिख दिया था भाई साहिब, जब इन दोनों की शादी को लेकर पहली ख़बर आई थी, दो खेलों का मिलन, दो देशों का मिलन, दो रूहों का मिलन, लेकिन वो पंजाबी में लिखा था।

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  2. बढ़िया मुद्दा हो गया है आज कल देशवासी हर बात भूल कर इसी मुद्दे के पीछे पड़े है..

    बढ़िया व्यंग....बधाई हो भैया

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  3. साफ नहीं पढ़ पाये, जरा अलग से ईमेल कर दिजिये झा जी कटिंग, प्लीज़!

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  4. समीर जी , चित्र पर चटका लगाने के बाद छवि खुल जाती है उससे आप स्पष्ट पढ सकते हैं और हां आपको मेल में भी भेज दिया है । असली बात कहिए न कि सारा दिन तो अब बजियाते रहते हैं तो मेल में ही सुविधा जनक होगा न । हा हा हा खैर शुक्रिया आपका
    अजय कुमार झा

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टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....

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