प्रचार खिडकी
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बुधवार, 31 अगस्त 2011
रांची एक्सप्रेस , रांची में प्रकाशित एक आलेख
मंगलवार, 29 मार्च 2011
दैनिक महामेधा दिल्ली में प्रकाशित मेरा एक आलेख.....
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महामेधा,
रद्दी की टोकरी
शुक्रवार, 25 मार्च 2011
तरूण देश , भीलवाडा( राजस्थान ) में प्रकाशित एक आले्ख
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्भीलवाडा
बुधवार, 10 नवंबर 2010
दैनिक विराट वैभव (दिल्ली ) में प्रकाशित मेरा एक आलेख ...अजय कुमार झा
वर्ष २००७ में ,ये आलेख , मेरे उपनाम , अजय रमाकांत ( उन दिनों मैं अजय रमाकांत के नाम से लिखा करता था ) से प्रकाशित हुआ था । आलेख को पढने के लिए उस पर चटका लगा दें , और छवि को और बडा करने के लिए दोबारा चटका दें ,और फ़िर आराम से उसे पढ सकते हैं ।
बुधवार, 2 जून 2010
आज के "डेली हिन्द मिलाप" , (हैदराबाद ),तथा "सच कहूं" सिरसा, में में प्रकाशित मेरा एक आलेख
दैनिक सच कहूं सिरसा में प्रकाशितआज के दैनिक डेली हिन्द मिलाप , हैदराबाद में प्रकाशित(आलेख को पढने के लिए उसे चटकाएं, और अलग से खुली खिडकी में,दिखने वाली छवि को चटका कर आराम से पढा जा सकता है ) , इस आलेखको आप ब्लोग पोस्ट के रूप में पहले भी पढ चुके हैं ।
सोमवार, 17 मई 2010
कसाब को फ़ांसी पर, आज के "दैनिक सच कहूं" में प्रकाशित मेरा एक आलेख
आलेख को पढने के लिए उस पर चटकाने पर जो छवि खुले उसे चटका कर आराम सेपढा जा सकता है । दैनिक सच कहूं , सिरसा एवं दिल्ली से प्रकाशित
शनिवार, 15 मई 2010
प्रिंट मीडिया बनाम इलेक्ट्रानिक मीडिया : दैनिक महामेधा में आज प्रकाशित मेरा एक लघु आलेख
इस आलेख को आप ब्लोग पोस्ट के रूप में पहले पढ चुके हैं , आलेख को पढने के चित्र को चटकाने पर जो छवि खुले उसे चटका कर आराम से पढ सकते हैं
सोमवार, 10 मई 2010
"दैनिक महामेधा "दिल्ली तथा "दैनिक सच कहूं सिरसा" में प्रकाशित दो लघु आलेख
सच कहूं सिरसा हरियाणा में प्रकाशितये दोनों आलेख आप मेरी ब्लोग पोस्टों के रूप में पढ चुके हैं । आलेख को के लिए उस पर चटका लगाने पर जो छवि खुले उसे फ़िर से चटका कर पढ लें
गुरुवार, 6 मई 2010
भारत में उठी यौन व्यवसाय पर एक बहस ( मेरा एक प्रकाशित आलेख )
दैनिक महामेधा दिल्ली में आज ही प्रकाशित आलेख जो "मुद्दा "स्तंभ के अतंर्गत प्रकाशित हुआ है । अबकि बार आप बस एक
क्लिक करें छवि बडी ही नहीं बहुत बडी हो जाएगी ।
बुधवार, 7 अप्रैल 2010
सानिया मुद्दा इज द रियल मुद्दा : आज हरिभूमि में प्रकाशित मेरा व्यंग्य
व्यंग्य को बडा करके पढने के लिए उसके उपर चटका लगाएं या औन लाईन पढने के लिए यहां जाएं
शनिवार, 7 नवंबर 2009
क्यों खो रहा है बचपन ( दैनिक पंजाब केसरी में प्रकाशित एक आलेख )
चित्र को बडा करने के लिये उस पर एक चटका लगाएं ।
बच्चों के हालातों पर , लिखा गया एक सामयिक आलेख जिसे दैनिक पंजाब केसरी, दिल्ली संस्करण में स्थान मिला ।ये उन दिनों की बात है जब मैं अजय (रमाकांत) ( मेरे पिताजी का नाम ) के उपनाम से लिखा करता था
रविवार, 29 मार्च 2009
समाज को निगलता अपराध (एक प्रकाशित आलेख )
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