प्रचार खिडकी

शब्द चित्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शब्द चित्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 23 जुलाई 2017

बहुत गहरी हैं ये आँखें मेरी



चंद बिखरे सिमटे आखर , बेतरतीब ,बेलौस से , बात बेबात कहे लिखे गए , उन्हें यूं ही सहेज दिया है ........




दो दरखत एक शाख के , एक राजा की कुर्सी बनी दूसरी बुढापे की लाठी 







शनिवार, 27 दिसंबर 2014

कुछ शब्द चित्र ...


....... फ़ोटो खींचने और सहेज़ने की स्वाभाविक सी आदत कब शौक बन गई पता ही नहीं चला , अब उन सहेज़ी गई फ़ोटो को "शब्द-चित्रों" के रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास किया है .............











Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...