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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

औरत : एक अंतहीन संघर्ष यात्रा

                                        औरत : एक अंतहीन संघर्ष यात्रा एक प्रकाशित आलेख
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शनिवार, 6 मार्च 2010

बेटियां क्यों पैदा होती हैं .....???

बहुत पहले ये पोस्ट लिखी थी ...जाने आज फ़िर क्यों इसे लिखने पढने और पढाने का मन किया ........................
आप सोचेंगे कि ये क्या सवाल हुआ .फ़िर तो कोई कहेगा कि क्यों निकलता है सूरज और क्यों होती है रात, क्योंबदलते हैं दिन और महीने। हाँ , हाँ हो सकता है कि आप को ये इसी तरह का एक बेतुका सवाल लगे मगर मैं ये बातयहाँ इसलिए उठा रहा हूँ क्योंकि पिछले कुछ समय से ना सिर्फ़ इस ब्लॉगजगत पर बल्कि विभिन्न माध्यमों मेंऔर बहुत से लोगों , विशेषकर महिलाओं द्वारा , ये सवाल खूब उठाया गया है, बहुत सारे तर्क-वितर्क , आकलन, विश्लेषण, आरोप खासकर पुरुषवादी मानसिकता और समाज पर हर बार उंगली उठाई जाती रही है। और कमोबेश ये कहीं ना कहीं सच तो हैं ही, मगर और भी कुछ बातें हैं जो शायद सामने नहीं आती , या कि उन्हें सामने लाया नहीं जाता।

कल यूं ही किसी ने किसी से पूछ लिया , यार ये बेटियाँ पैदा ही क्यों होती हैं, काफी देर के बहस के बाद कुछ उत्तर ऐसे मिले :-

--बेटियाँ इसलिए पैदा होती हैं, ताकि उसे पैदा करने वाली माँ को उसके पापबोध का एहसास कराया जा सके। उसेबताया जा सके कि ये उसके सभी गुनाहों की या कहें कि ख़ुद औरत के रूप में पैदा होने की सबसे बड़ी सजा है जिसकी कोई माफी नहीं है॥

बेटियाँ इसलिए पैदा होती हैं ताकि बेटों को एहसास दिलाया जा सके कि देखो इनकी तुलना में तुम्हारा महत्व हमेशा ज्यादा रहा है और रहेगा॥

बेटियाँ इसलिए भी पैदा होती हैं ताकि समाज को कोई मिल सके , कोसने के लिए, पीटने के लिए, नोचने के लिए, सहने के लिए...

बेटियाँ , और बेटियों के बाद फ़िर बेटियाँ इसलिए पैदा होती हैं कि , काश किसी बार बेटा पैदा हो जाए .....

उत्तर मिल ही रहे थे कि बीच में किसी ने टोक दिया , क्यों फालतू की मगजमारी कर रहे हो तुम्हें नहीं पता अब बेटियाँ कहाँ पैदा हो रही हैं, उन्हें तो गर्भ में ही मारा जा रहा है।

दूसरे ने कहा , तुम हर बार ये बात उठाते हो और वही पुराना राग अलापते हो मगर किसी बार ये नहीं कहते कि बेटियोंके जन्म पर सबसे ज्यादा दुःख और अफ़सोस कौन जताता है, माँ, सास , चाची , मामी और ये कन्या भ्रूण हत्या करने वाली डाक्टरनियों के अन्दर क्या किसी पुरूष का दिल और दिमाग लगा रहता है ये बहस चलती ही जारही है और आगे भी चलती रहेगी। बेटियाँ पैदा होती रहे इसी में इस संसार का अस्तित्व बचा है अन्यथा कहीं कुछ भी नहीं बचेगा.....


शनिवार, 8 नवंबर 2008

औरत एक अंतहीन संघर्ष यात्रा


अपनी पिछले पोस्ट में नारी ने मुझे शिकायत की , कि मैंने ब्लॉग्गिंग पर लिखे और छपे अपने विस्तृत आलेख में महिला ब्लोग्गेर्स के लिए ज्यादा नहीं लिखा, हलाँकि मैंने उन्हें आश्वाशन दे दिया है कि जल्दी ही मैं उनकी ये इच्छा भी पूरी कर दूंगा, मगर फिलहाल मुझे लगा कि शायद ये उपायुक्त अवसर होगा कि महिला जीवन पर मेरा एक आलेख को मैं यहाँ पर छाप सकूं।
* छपे हुए आलेख को पढने के लिए उस पर क्लिक करें.
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