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शनिवार, 7 फ़रवरी 2015

इस्सक उस्सक में जग मुआ .....




आजकल दिल्ली का मौसम अफ़लातून हुआ जा रहा है , यूं तो "दिल्ली मेरी जान".की तर्ज़ पे यहीं उत्ता मसाला तो तकरीबन रोज़ ही फ़ैला या फ़ैलाया जाता रहता है कि शाम को टेलिविजन पर बकर काटने के लिए बैठे तमाम तबेलेनुमा टीवी महाबहस में सबको कुछ न कुछ जुगाली के लिए तो मिल ही जाना चाहिए , और मिल भी जाता है । फ़िर ठीक चुनावों से पहले तो टीवी चैनलों में उस तरह की तैयारी की जाती है जैसे मेले से ठीक पहले कल्लन हलवाई अपनी कडाई कडछी के पेंच कस के मजबूत कर लिया करते थे ताकि जलेबी निकालने में तनिक भी स्पीड कम न हो । और स्पीड देखिए टीवी वालों ने तो बाइस मिनट में दो सौ बाइस जलेबियां , मेरा मतलब खबरें ठोंक के कल्लन हलवाई को भी काम्प्लैक्स दे डाला है 

मगर सिर्फ़ चुनाव का ही झंझट नहीं है न जी कि सिर्फ़ कोरी कोरी भौं भसड चीखने चिचियाने का ही टैंशन है , टैंशन तो इस बात का भी है न वसंत पंचमी के ठीक थोडे दिन बाद और होली के बौराए हुए मौसम से ठीक थोडा पहले एक नएं सैंटा जी नो प्रेम संदेश घर घर पहुंचाया था उसे अब बराबर से सीरीयसली लिया जा रहा है । जन्नेशन भौतई सीरीयस है, प्रेम के नाम पर ,.भौत बडा व्यापार चल निकला है , और फ़िर व्यापार चले भी क्यों न जब प्यार भी कित्ता तो चल निकला है ,चलाउ प्यार बहुत ज्यादा चलता है समझिए कि चलता ही जाता है , खैर । 



तो गोया किस्सा ये कि इस महाघनघोर राजनैतिक चुनाव की चभड चभड में , वो तो भला हो सैंट वेलेन्टाईन की अब तक हमें कतई भी मालूम नहीं उन सारे प्रयासों कि अब तो हर बरस बस्स भौत सारे इसी दिन मर मिटने को आतुर पाए जाते हैं । और उससे ज्यादा भला हो व्हाट्स अप्प का कि जिसने इत्ती सुविधा भी दे रखी है अलग से कि अगला या अगली एक ग्रुप अपनी सखा/सहेलियों का बना एक ही बार उसके बिना जीने मरने की कसम खा के सभी कतारबद्धों को एक ही टीप में एक ही दिल की एक ही बात बता देता/देती है । 



इस्सक उस्सक की बात चली है तो अपनी राजनीति भी कम इस्सकबाज़ नहीं रही है , कभी भी आमने सामने आकर पार्टियां एक दूसरे को बेवफ़ाई वाली सारी भावनाएं ...गद्द रूप में प्रस्तुत कर लेती देती हैं , अब कौन भला गा बजा कर कोसता गलियाता है । मगर बक्सा खुलते ही , पार पाए हुओं में जाने कहां से अपरंपार प्यार उमड जाता है कि बस सब फ़ट्ट से अपनी अपनी कुर्सी , बंगले का माप तैयार करने में लग जाते हैं ....ऐसी ऐसी संभावनाएं तलाशी जाती हैं जो खुद संभावना सेठ भी बिग बॉस में बकर करने के लिए नहीं तलाश पा सकी थीं 

अभी कई किस्से है ..सुनाते रहेंगे किश्तों में ............

रविवार, 2 मार्च 2014

आईने खुद बखुद संवर जाएंगे





किताबों में बनके रहे , सूखे हुए गुलाबों की तरह ,
सिर्फ़ देखना , जो छूने की कोशिश की , टूट के बिखर जाएंगे ॥

सिमटा रहने दे हमें , अपनी यादों के बंद एलबम में ,
जो पलट के देखा तस्वीरों को , अश्क बनके आंखों में उतर जाएंगे॥

एक तू, एक मैं ही नहीं , जिस पर समय ने ढाए सितम ,
तुझे ये लगा ही क्यूं , कि  अबकि वक्त के ये पहिए ठहर जाएंगे ॥

गरीब सो न सका जो फ़ुटपाथ पर , रहा रात इस फ़िक्र में ,
हाकिम ने भेजा संदेशा, नए सपने दिखाने , उसके घर आएंगे ॥

अब तो मौसम हुआ है , सडकों , मैदानों , दालानों का ,
रुत बदलते ही फ़िर टीवी , या बाइस्कोप में ही नज़र आएंगे ॥

कुछ अब भी जद्दोज़हद में है , जांच और परख की ,
मगर कशमकश भी बची है कहां , इधर जाएंगे या उधर जाएंगे ॥

क्यूं कोसते रहें आइनों को , कि जब चेहरे खुद बेइमान हैं ,
पहले हटाया जाए निशानों को तेज़ाब से , आइने खुद बखुद संवर जाएंगे ॥

सुनो सियासत में हंगामा क्यूं है बरपा , ऐसी क्या अलग कयामत होगी,
या बिगडों के साथ वो बिगड जाएंगे , या बिगडे हुए खुद सुधर जाएंगे ॥

हम बेशक बना लें वक्त से तेज़ भागती हुई चमकती लहकती हुई सडकें ,
सोचता हूं ,मौत सी रफ़्तार थामे स्कूटियों पे बैठे ये बच्चे कल किधर जाएंगे  ॥

गुरुवार, 14 नवंबर 2013

बस एक अदद झूठी अफ़वाह की दरकार है .........










उसे नफ़े नुकसान की फ़िक्र नहीं बिल्कुल भी ,
उसका सपने बेचने का ,सालों का कारोबार है ॥
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हम फ़ूंक डालते हैं , खुद बस्तियों को अपनी ,
बस एक अदद झूठी अफ़वाह की दरकार है ॥
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तुम देश दुनिया मंगल करने के देखते हो सपने ,
अगला बेबस है इतना , टमाटर प्याज़ से भी लाचार है ॥
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राशन, रोज़गार की हालत में पैबंद लगे हों बेशक,
मगर जिसका भी सुनिए , भाषण सबका जोरदार है ॥
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लाशों पर लाशें रखकर , चल रहा है निर्माण इसका ,
नहीं टूटेगी अब ,बहुत हो गई ऊंची ,सरहद की दीवार है॥
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मेरी तेरी मौत की अहमियत अब खत्म हो गई ,
खुद खंजर हाथ में लिए ,सामने सरकार है ॥
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उसे माफ़ है सातों खून का गुनाह भी ,
वो जो राजमाता की बेटी का भतार है ॥
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तुम हंस लो कहकहे लगा के उसकी बेवकूफ़ी पर बेशक,
मगर गैरत बची है उसकी , वो अब तक खुद्दार है ॥
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अब इस देश में गुनाहों की बात करना खुद एक गुनाह है ,
वो कहते हैं तुम्हारे पास , इंज्वाय करने को बलात्कार है ॥
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बहुत मोटी हो गई है चर्बी, बेशर्मी और बेहयाई की बेशक,
काट के उतार देंगे केंचुली उनकी ,हमारी तेज़ बहुत धार है ॥


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