अभी तक क्राईम टाईम्स , दिल्ली में , "ब्लोग हलचल" में निरूपमा हत्याकांड पर लिखी गई कई पोस्टों की चर्चा
आलेख को पढने के लिए चटका कर , जो भी छवि अलग खिडकी में खुले , उसे चटका कर आप आराम से पढ सकते हैं । इस अंक में , गपशप का कोना ,एक आलसी का चिट्ठा , घुघुती बासूती, चोखेरबाली, और अखिलेस सिंह आदि का उल्लेख
कल एक बात लिखने को हुआ था कि अचानक अर्जेंट काम आ गया ! रद्दी की टोकरी नाम उसी तर्ज पर दिया गया है जैसे दूकान में लालाजी चींटियों को धोखा देने के लिए चीनी की बोरी के ऊपर नमक का टैग लगा देते है :)
क्या ब्लोग्वानी ऐसे ब्लोगों को रख कर खुश होता है या यह उसकी मजबूरी है देख लीजिये खुद ही ब्लोग्वानी को जहां मां बहन की हद दर्जे की अश्लील गालियाँ खुले आम दिखाई जाती हैं आगे पड़े और देखें
टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....
सराहनीय प्रयास ,उम्दा प्रस्तुती | ब्लॉग और ब्लोगिंग का भविष्य उज्जवल है और इसके लिए आपका(अजय जी) योगदान भी याद किया जायेगा |
जवाब देंहटाएंबहुत खूब अजय भाई |
जवाब देंहटाएंशुभकामनाये
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा लगा अजय जी
जवाब देंहटाएंप्रशंसनीय प्रयास
जवाब देंहटाएंबढ़िया प्रयास , जारी रखिये झा साहब !
जवाब देंहटाएंकल एक बात लिखने को हुआ था कि अचानक अर्जेंट काम आ गया ! रद्दी की टोकरी नाम उसी तर्ज पर दिया गया है जैसे दूकान में लालाजी चींटियों को धोखा देने के लिए चीनी की बोरी के ऊपर नमक का टैग लगा देते है :)
Prashanshniya aur anukarniya prayas ke liye dhanyavaad
जवाब देंहटाएंक्या ब्लोग्वानी ऐसे ब्लोगों को रख कर खुश होता है या यह उसकी मजबूरी है
जवाब देंहटाएंदेख लीजिये खुद ही ब्लोग्वानी को जहां मां बहन की हद दर्जे की अश्लील गालियाँ खुले आम दिखाई जाती हैं आगे पड़े और देखें
बहुत अच्छा लगा अजय जी
जवाब देंहटाएं