लिखते थे कागज़ पर कभी , इस ब्लॉगिरी ने मि.खिटपिट बना दिया , पढते थे कुछ कागज़ कभी , फ़ेसबुक ने चेहरों को ही पुस्तक बना दिया, आगे का सितम , न पूछो और हमसे सनम यूं खुलेआम कभी , रही सही जो बांकी थी , वो भी गई , इस मुएं ट्विट्टर ने 1:40 का लोकल बना दिया
चुनाव जीत दें अन्ना को जवाब , मेड्म्म जी का आदेश हुआ , लोकपाल से जनलोकपाल , हाय जी का ये कलेश हुआ ........
उफ़्फ़ आदत ही लग गई खसोटने की , अब इस देश का देखभाल उनसे किया नहीं जाता , साठ बरसों के लोकतंत्र में ,पहली बार मांगे जनता , इक लोकपाल तक दिया नहीं जाता ।
करवट भर बदल के , जम्हाई जरा तोडी भर है , अवाम के हुंकार से ही सियासत कांप रही थर थर है
सियासत के जिम्मे था वो विकास का माहौल बनाएगी , अबे हमें क्या मालूम था , ससुरी लोकतंत्र का माखौल उडाएगी
पहले निपट लो ज़रा इस लोकपाल से , सत्ता वालों , अब तो हर कानून से पहले , तुमसे ज़िरह होगी
जयललिता ने प्रधान जी से मुलाकात कर बढाया दबाव , नोंच नांच के हर कोई खाय , पिरधान जी बने हड्डी कबाब
मुशर्र्फ़ जानते थे आईएसआई ने लादेन को छिपा रखा है , तो का हुआ बे ओबमवा के डायरी में मुशर्रफ़ का भी एड्रेस लिखा रखा है
सरकार को आशंका है ,फ़िर बढ सकते हैं पेट्रोल के दाम , अबे ये क्यों हो रिया है , जब चचा सैम निपटा लिए ओसामा सद्दाम
मायावती ने चार मंत्रियों को किया बर्खास्त , लेट बहुत हो गया बहिन जी , सरकार का खुदे ,सांस है लास्ट
सालाना रपट कुछ इस तरह की , हम रहे हैं ठेल , कुछ पिटाए ,कुछ जेल गए , डाग्दर मोहन भी हो गए फ़ेल , लोकपाल एक्स्प्रेस चली तो सरकार हुई डिरेल , पचास परसेंट में भारी छूट , लगी आरक्षण महासेल ...
अगले एक हफ़्ते में साल भर की रपट पिरसतुत की जाएगी सीरीमान , चुल्लू भर पानी ,सरकार के लिए , हाय इत्ता जनता देने को ,बैठी है सम्मान ..
ल्यो जी सरकार अपनी बेशर्मी ,और लोग अपने सब्र का पैमाना जांच रहे हैं , बुद्धू बक्सा बोका भया , बिग बास में ,कुछ इंसान ,बंदर बनके नाच रहे हैं
टोकरी में जो भी होता है...उसे उडेलता रहता हूँ..मगर उसे यहाँ उडेलने के बाद उम्मीद रहती है कि....आपकी अनमोल टिप्पणियों से उसे भर ही लूँगा...मेरी उम्मीद ठीक है न.....
लगे रहो ओझा भाई !
जवाब देंहटाएंबहुत खूब और नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये !
जवाब देंहटाएंकल रात को देख ही ली होगी अपने टीवी सेट पर लोकतंत्र की नौटंकी :)
जय हो महाराज ... यह अदा भी निराली है आपकी ... पहले यहाँ वहाँ अपने आखर बिखेर देते हो ... फिर सब को समेट कर ... ऐसी निराली पोस्ट बना देते हो ... जय हो !
जवाब देंहटाएंवाह क्या बात है नया अंदाज़ !
जवाब देंहटाएंबहुत खूब.
कभी मेरे ( मचान ) पर भी आइये !
"कुछ कहते ,कुछ सुनते" बात हो ही जायेगी:)))
जवाब देंहटाएंकुछ कहते कुछ सुनते तो बहुत कुछ कह गए ..अब सरकार की जान लोगे क्या ? :)
जवाब देंहटाएंआज के समाचारों पर बढ़िया ताज़ा तज़करा
जवाब देंहटाएंजागरूकता चाहिए, भरनी रग-रग में
जवाब देंहटाएंउनके जो सोए हुए,देखो युग-युग से
नया अंदाज पसंद आया आपको नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएं।
जवाब देंहटाएंब्लॉग पे आकर प्रोत्साहित करने हेतु दिल से शुक्रिया आपका ! समर्थक बन रहा हूँ !
जवाब देंहटाएंझा जी जो कहिन ,सच कहिन !
जवाब देंहटाएंनये साल की मुबारक.....
बेहतरीन........आपको नववर्ष की शुभकामनायें
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