प्रचार खिडकी
शनिवार, 27 फ़रवरी 2010
लिव इन रिलेशनशिप : क्या तैयार है समाज (नई दुनिया में प्रकाशित मेरा एक आलेख )
नई दुनिया भोपाल संस्करण में दिनांक ,9/11/2009, को प्रकाशित एक आलेख
(आलेख को पढने के लिए उस पर चटका लगा दें )
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please check the image again its not readable
जवाब देंहटाएंरचना जी ,
जवाब देंहटाएंचित्र के ऊपर चटका लगाएं तो वो बडा होकर खुल जाएगा यदि उसके बाद भी दिक्कत हो तो ctrl + + से और बडा किया जा सकता है , छवि इससे बडी करने से पोस्ट में नहीं लोड हो सकती थी और शायद प्रति ,,थोडी अस्पष्ट है मगर पढी जा सकेगी ...असुविधा के लिए खेद है ..
मैंने पढ़ा,अच्छा आलेख,बधाई झा जी.
जवाब देंहटाएंthanks i will try your way
जवाब देंहटाएंसार्थक लेख लिखा अजय जी ! अभी दो दिन पहले ही मैं अमेरिका की एक खबर अपने घर वालो को दिखा रहा था जिसमे एक भारतीय मूल की नायिका, जिसने अभी-अभी एक बच्ची को जन्म दिया, और डेल कंप्यूटर के मालिक के छोटे भाई ने उसका बाप बनने की घोषणा की!
जवाब देंहटाएंनया लिखें अब
जवाब देंहटाएंलिव इन ब्लॉगरशिप
आप ने इस विषय पर सुंदर लिखा
जवाब देंहटाएंहोली की आप को ओर आप के परिवार को बहुत बहुत बधाई
Wah bhaia.. badhaai ho..
जवाब देंहटाएंइस बार रंग लगाना तो.. ऐसा रंग लगाना.. के ताउम्र ना छूटे..
ना हिन्दू पहिचाना जाये ना मुसलमाँ.. ऐसा रंग लगाना..
लहू का रंग तो अन्दर ही रह जाता है.. जब तक पहचाना जाये सड़कों पे बह जाता है..
कोई बाहर का पक्का रंग लगाना..
के बस इंसां पहचाना जाये.. ना हिन्दू पहचाना जाये..
ना मुसलमाँ पहचाना जाये.. बस इंसां पहचाना जाये..
इस बार.. ऐसा रंग लगाना...
(और आज पहली बार ब्लॉग पर बुला रहा हूँ.. शायद आपकी भी टांग खींची हो मैंने होली में..)
होली की उतनी शुभ कामनाएं जितनी मैंने और आपने मिलके भी ना बांटी हों...
अच्छा लेख है ।
जवाब देंहटाएंहोली की बहुत-बहुत शुभकामनायें.
जवाब देंहटाएंसार्थक लेख लिखा अजय जी !
जवाब देंहटाएंआप ने इस विषय पर सुंदर लिखा
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